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गड्ढे भर गए, रूट डायवर्ट हो गया… पर सांडों से कौन बचाएगा भोले को ?

कांवड़ यात्रा से पहले आवारा गौवंश बने सबसे बड़ी चुनौती

उझानी बदांयू 27 जुलाई ।

30 जुलाई से शुरू हो रही पवित्र कांवड़ यात्रा को लेकर जिला प्रशासन मुस्तैद है। भोले भक्तों की सुविधा के लिए सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त, जगह-जगह स्वास्थ्य शिविर, रूट डायवर्जन और टूटी सड़कों के गड्ढे तक भरवाए जा रहे हैं। मकसद साफ है – कांवड़ियों को रास्ते में कहीं रुकना न पड़े।

लेकिन इन तमाम व्यवस्थाओं के बीच प्रशासन एक सबसे बड़े खतरे को नजरअंदाज कर रहा है – बाजार से लेकर सड़कों और हाईवे पर बेखौफ घूम रहा आवारा गौवंश।

उझानी की सड़कों, बाजारों और कछला मार्ग पर गाय और सांडों के झुंड दिनभर डेरा जमाए रहते हैं। यही नजारा कभी भी कांवड़ियों और आम जनता के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले वर्ष उझानी के मुख्य बाजारों में आवारा सांडों की लड़ाई के कारण घंटों जाम लगा था और कई श्रद्धालु घायल भी हुए थे। इस बार भी वही स्थिति बनने के आसार हैं।

करोड़ों रुपये खर्च कर कछला गंगा घाट पर कान्हा गौशाला बनाई गई, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं बदला। गंगा स्नान को आने वाले श्रद्धालु आज भी घाट पर गाय और सांडों की वजह से परेशान हैं। गाय व सांडों के झुंडों के कारण स्नान करना मुश्किल हो रहा है।

नगरवासियों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले युद्धस्तर पर अभियान चलाकर आवारा गौवंश को पकड़कर गौशालाओं में भेजा जाए। वरना “बम-बम भोले” के जयकारों के बीच “सांडों का आतंक” सबसे बड़ी बाधा बन जाएगा।

अगर समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं हुई तो प्रशासन की सारी मेहनत पर पानी फिर सकता है।

राजेश वार्ष्णेय एमके

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