डूबता अस्पताल- उझानी CHC बना झील, स्ट्रेचर की जगह नाव की दरकार!।
उझानी-बदांयू 1 जुलाई।
उझानी सीएचसी में इलाज कराने आए हो या ‘जल-विहार’ करने? बुधवार सुबह 11 बजे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, उझानी पहुंचे मरीजों के सामने यही सबसे बड़ा सवाल था। सुबह हुई मूसलाधार बारिश ने अस्पताल को ‘आपातकालीन वॉर्ड’ से ‘कृत्रिम झील’ में बदल दिया।
मुख्य गेट पर कदम रखते ही घुटनों तक गंदा-महकता पानी मरीजों का स्वागत कर रहा था। इमरजेंसी,ओपीडी तक पहुंचना किसी ‘अग्निपथ’ से कम नहीं था। 102 बुखार में तपता बच्चा मां की गोद में, लड़खड़ाते बुजुर्ग, प्रसव पीड़ा से कराहती महिला सब कीचड़ भरे ‘तालाब’ में डुबकी लगाकर डॉक्टर तक पहुंचे। स्ट्रेचर की जगह नाव होती तो शायद मरीजों को राहत मिल जाती!
दोपहर बाद बारिश रुकते ही CHC परिसर ने दलदल का रूप ले लिया। फिसलन, बदबू और गंदगी के बीच मरीजों का दर्द दोगुना हो गया। “अस्पताल में आकर उल्टा इंफेक्शन लेकर जाएंगे,” एक तीमारदार ने गुस्से से थूकते हुए कहा। इलाज से पहले संक्रमण का ‘फ्री गिफ्ट’ मिल रहा है।
स्थानीय लोगों का पारा हाई वोल्टेज पर है। “ये कोई नई फिल्म नहीं, हर मानसून में यही ब्लॉकबस्टर चलती है,” भीड़ में खड़े एक बुजुर्ग चिल्लाए। “कागजों पर लाखों के नाले बनते हैं, जमीन पर सिर्फ कीचड़ मिलता है।” लोगों का आरोप है कि शिकायतों की फाइलें तो मोटी हो गईं, पर अफसरों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।
लोगों का कहना है जो अस्पताल शहर को बीमारी से बचाने के लिए बना था, वो खुद ‘वेंटिलेटर’ पर है। फिलहाल उझानी CHC में इलाज नहीं, ‘जल-समाधि’ का इंतजाम चल रहा है। सवाल वही— कब जागेगा सिस्टम? कब होगा बरसाती पानी के निकलने का इंतजाम यह तो हर बारिश में होता है।
राजेश वार्ष्णेय एमके।







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