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बदायूँ पुलिस का ‘फर्जी FIR कांड’ – SSP ने माना, ‘विवेचक ने विदेश में बैठे शख्स पर चिपकाया नोटिस

बदायूँ पुलिस का ‘फर्जी FIR कांड’ – SSP ने माना, ‘विवेचक ने विदेश में बैठे शख्स पर चिपकाया नोटिस’

स्कूल प्रबंधन ने जमीन हड़पने को रची साजिश, CO-SP बोले- ‘आरोप पत्र निरस्त करो, पुलिसवालों की जाँच करो’।

उझानी-बदांयू 9 जून।

बदायूँ पुलिस की किरकिरी का सबसे बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ उझानी के सर्राफा कारोबारी और समाजसेवी संजय कुमार मित्तल को फँसाने के लिए पुलिस ने ऐसा खेल रचा कि सुनकर आपके होश उड़ जाएँगे।

उझानी पुलिस ने सिंगापुर में बैठे शख्स को नोटिस थमा दिया! जी हाँ, दस्तावेज चीख-चीखकर कह रहे हैं कि विवेचक प्रताप सिंह ने 3 जून 2025 को संजय मित्तल पर नोटिस तामील दिखाया, जबकि एयर इंडिया का टिकट बता रहा है कि मित्तल 02 जून की रात 10 बजे ही परिवार सहित सिंगापुर रवाना हो चुके थे। वापसी 12 जून 2026 को हुई। यानी पुलिस ने विदेश में छुट्टी मना रहे शख्स को बदायूँ में खड़ा कर दिया!
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क्या है पूरा मामला ‘जमीन हड़पो, FIR ठोको हर विलास गोयल इंटरनेशनल स्कूल ने संजय मित्तल के पिता की ट्रस्ट वाली जमीन पर कब्जा कर लिया। मामला सुप्रीम कोर्ट से लेकर जिला जज तक, कुल 8 अदालतों में चल रहा है।
दबाव का हथकंडा स्कूल के एकाउण्टेन्ट सोमिल अदलख्खा ने IG बरेली से आदेश कराकर 3 मई 2025 को FIR 169/2025 दर्ज करा दी। धाराएँ लगाईं- रंगदारी, धमकी, मारपीट।————-

CJM ने पहले ही लताड़ा था,इसी एकाउण्टेन्ट ने पहले भी CJM कोर्ट में झूठा प्रार्थना पत्र दिया था। कोर्ट ने 08.05.2025 को उसे “निराधार, असत्य, मनगढ़न्त” कहकर खारिज कर दिया था।
विवेचक ने आँख मूंदकर ठोका आरोप पत्र- प्रताप सिंह और गुड्डू सिंह ने बिना CCTV देखे, बिना दीवानी केस पढ़े, सरसरी तौर पर आरोप पत्र 164/2025 कोर्ट भेज दिया।
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फिर आया ट्विस्ट – पुलिस ने ही पुलिस की पोल खोल दी!

CO उझानी डॉ. देवेन्द्र कुमार ने 28.06.2025 को लिख दिया- “विवेचक का काम लापरवाही, अकर्मण्यता और स्वेच्छाचारिता का प्रतीक है”। आरोप पत्र रुकवाकर नई जाँच बिठा दी।
नए विवेचक शिव कुमार मलिक ने बम फोड़ दिया। 27.02.2026 की रिपोर्ट में लिखा- “मुकदमा झूठा व फर्जी बनावटी है। वादी ने सच्चाई छिपाई, गवाह मुकर गए। सिविल केस में दबाव बनाने को FIR कराई गई”।
SP बदायूँ ने 11.03.2026 को मुहर लगा दी- “पूर्व विवेचकों ने तथ्यों की अनदेखी कर मनमाना आरोप पत्र भेजा। आरोप पत्र निरस्त करो और उन पुलिसवालों की जाँच करो”।

वादी ने भी कर दिया सरेंडर- स्कूल का एकाउण्टेन्ट अब शपथ पत्र दे रहा है- “हमारा फैसला हो गया, कोई कार्यवाही नहीं चाहिए”।
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अब संजय मित्तल का पलटवार- 26.05.2026 को SSP को प्रार्थना पत्र देकर माँग की है- “मुझे फर्जी फँसाने वाले विवेचक प्रताप सिंह और गुड्डू सिंह को दण्डित किया जाए। मैं आयकर दाता हूँ, सर्राफा कमेटी अध्यक्ष हूँ, समाज में बदनामी हुई जिसकी भरपाई नहीं हो सकती”।

जब CJM कोर्ट पहले ही शिकायत खारिज कर चुका था, जब प्रार्थी विदेश में था, तो FIR दर्ज कैसे हुई? आरोप पत्र कैसे भेजा गया? क्या वर्दी के पीछे छिपकर जमीन माफिया खेल रहे थे?

पूरे जिले की निगाहें आला अधिकारियों पर हैं। SP और CO की रिपोर्ट टेबल पर है। अगर आरोप पत्र निरस्त होता है तो यह बदायूँ पुलिस के लिए ‘सबक’ बनेगा। और अगर दोषी पुलिसवालों पर गाज गिरती है तो यह ‘नजीर’ बन जाएगा।

—— राजेश वार्ष्णेय एमके।

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