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अस्पताल या ‘लाचारी केंद्र’? उझानी CHC में पानी-फिल्म-किट सब गायब, मरीज दर-दर भटकने को मजबूर

अस्पताल या ‘लाचारी केंद्र’? उझानी CHC में पानी-फिल्म-किट सब गायब, मरीज दर-दर भटकने को मजबूर।

उझानी बदांयू 8 जून।

सरकार ‘आयुष्मान भारत’ के दावे करती है, पर बदायूं के उझानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीज इलाज नहीं, जिल्लत लेने आ रहे हैं। यहां स्वास्थ्य सेवाएं नहीं, अव्यवस्थाओं का एक्सरे हो रहा है।
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हालात देखिए, आंखें शर्म से झुक जाएंगी- पानी को तरसे जांच कक्ष, कई जांच रूम और वार्डों में नल सूखे पड़े हैं। मरीज एक कक्ष से दूसरे कक्ष तक पानी के लिए भटक रहा है। साफ-सफाई भगवान भरोसे, स्वास्थ्यकर्मी खुद हाथ धोने को मोहताज नजर आते हैं।
एक्सरे मशीन शोपीस बनी- सोमवार दोपहर 1 बजे मरीज एक्सरे कराने पहुंचे तो जवाब मिला- “फिल्म ही खत्म है।” हड्डी टूटी हो या सीने में दर्द, यहां इलाज नहीं, तारीख मिलती है।
ईसीजी का रोल ही ‘गोल’- दिल की धड़कन जांचने को ECG मशीन तो है, पर कागज का रोल नहीं। यानी दिल बैठ रहा है तो बैठने दो, अस्पताल बेबस है।
हेपेटाइटिस की किट नदारद- लैब में हेपेटाइटिस-B और C की जांच किट का अकाल। संक्रमण है या नहीं, मरीज अंदाजा लगाते रहें।
CBC भी नहीं हो पा रही- खून की सबसे बेसिक जांच CBC तक ठप। बुखार-बदन दर्द वाले मरीज बिना जांच के ही लौट रहे हैं।
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रोज सैकड़ों मरीज यहां उम्मीद लेकर आते हैं। पर पानी नहीं, फिल्म नहीं, रोल नहीं, किट नहीं – तो अस्पताल में है क्या? सिर्फ बिल्डिंग और ताला? स्टाफ मजबूर है, मरीज लाचार हैं, और प्रशासन के कानों पर जूं नहीं रेंग रही।

जनता का गुस्सा फूटा-
स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है- “अगर हफ्ते भर में व्यवस्था नहीं सुधरी तो CHC पर ताला जड़ेंगे।” मरीजों का दर्द है कि प्राइवेट लैब में लुटो या सरकारी अस्पताल में तड़पो, विकल्प ही नहीं बचा।
इलाज को आऐ लोगों का कहना है ये लापरवाही नहीं, सीधे मरीजों की जान से खिलवाड़ है। एक्सरे फिल्म और ECG रोल जैसी बेसिक चीजें तक न होना बताता है कि स्वास्थ्य विभाग की ‘नब्ज’ खुद ICU में है।
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राजेश वार्ष्णेय एमके।


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