बस अड्डे हों या फिर रेलवे स्टेशन, गली-मोहल्लों में भी घूम रहे आवारा कुत्ते।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश भी बेअसर
उझानी-बदांयू 17 अप्रैल।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद उझानी में गली-मोहल्लों सहित रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और स्कूलों के बाहर आवारा कुत्तों की समस्या बनी हुई है। प्रशासनिक योजनाएं कागजों तक सीमित हैं, जिससे लोगों की सुरक्षा पर खतरा लगातार बढ़ रहा है।

उझानी में हर गली मोहल्ले सहित रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और स्कूल परिसर में कुत्तों की आवाजाही बनी हुई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं दिख रहा है।
आवारा कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं को जन-सुरक्षा संकट मानते हुए नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इनकी आवाजाही रोकने के निर्देश दिए थे। इन निर्देशों के तहत जिला प्रशासन और नगर निकायों को दो सप्ताह के भीतर सभी सरकारी-निजी स्कूल-कॉलेज, अस्पताल, खेल परिसर, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों की सूची तैयार करनी थी।
इस सूची में उन परिसरों को चिह्नित किया जाना था जहां आवारा कुत्तों से लोगों को खतरा है। प्रत्येक परिसर में एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति अनिवार्य की गई थी। हालांकि, फाइलों में कार्ययोजना लागू होने के बावजूद धरातल पर स्थिति जस की तस है। नगर के सरकारी अस्पताल हो या रेलवे स्टेशन नगरपालिका कार्यालय प्रागंण आदि में कुत्ते घूमते मिल जाएंगे।



किसी भी जिम्मेदार अधिकारी से पूछो तो रटा-रटाया एक ही जबाब कि कुत्तों के प्रवेश को रोका जाएगा। कर्मचारी तैनात रहते हैं, फिर भी यदि कुत्तों का प्रवेश बना हुआ है तो इसे दिखवाया जाएगा और रोका जाएगा।
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