






बदांयू 28 फरवरी।
होली पर रासायनिक रंगों का इस्तेमाल सेहत पर भारी पड़ सकता है। बाजार में बिक रहे कई सस्ते सिंथेटिक रंगों में खतरनाक रसायन मिलाए जाते हैं जो त्वचा, आंखों और सांस संबंधी समस्याओं का कारण बन सकते हैं। त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार, इन रंगों से एलर्जी, खुजली, चकत्ते और त्वचा संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इससे बचाव के लिए प्राकृतिक और हर्बल रंगों का उपयोग करें।
होली का त्योहार नजदीक आते ही शहर के बाजार रंग और पिचकारियों से सज गए हैं। दुकानों पर रंगों की बिक्री शुरू हो चुकी है। बाजार में जहां ब्रांडेड और हर्बल रंग उपलब्ध हैं, वहीं सस्ते और रसायन युक्त सिंथेटिक रंगों की भी भरमार है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ.अशोक कुमार का कहना है कि दानेदार रंग आंख में चले जाने पर कॉर्निया को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उनका कहना है कि सांस के मरीजों, खासकर अस्थमा से पीड़ित लोगों के लिए ये रंग अधिक खतरनाक साबित हो सकते हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ का कहना है कि बच्चों की त्वचा नाजुक होने के कारण केमिकल युक्त रंग से संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है।
रंगों में पाए जाने वाले हानिकारक केमिकल
हरा रंग – कॉपर सल्फेट
सिल्वर रंग – एल्युमिनियम ब्रोमाइड
लाल रंग – मरकरी सल्फेट
बैंगनी रंग – क्रोमियम आयोडाइड
काला रंग – लेड ऑक्साइड
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बरतें ये सावधानियां
होली खेलने से पहले शरीर पर सरसों का तेल या बॉडीलोशन लगाएं
रंग छुड़ाते समय त्वचा को जोर से न रगड़ें
साफ और ठंडे पानी से रंग हटाएं
बेसन, दही और हल्दी का उबटन लगाकर रंग साफ करें
नारियल तेल या मेकअप रिमूवर का इस्तेमाल करें
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