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उझानी- बदांयू 2 फरवरी।
नगर में मिलावटखोरी का धंधा अपने शबाब पर है। सड़क पटरियों पर सजी ठेले वाली दुकानों, होटलों और ढाबों पर परोसे जा रहे पके-पकाए खाद्य सामग्री भी शुद्धता से परे है तो घर की रसोई भी आपको सेहतमंद रखने में कारगर नहीं है।
क्योंकि दुकानों से रसोई तक पहुंचने वाले दूध, ब्रेड, खोवा, पनीर, नमकीन, दाल, तेल आदि कच्चे खाद्य सामग्री में भी मिलावट जारी है। इनसे रंग मिलाकर तैयार किए जा रहे लजीज व्यंजन आमाशय तक पहुंच रहै है। यह पेट के लिए खतरनाक साबित हो रहा है।
बता दें कि खाद्य पदार्थों से मोटी कमाई करने वालों ने मिलावट के कई तरीके ईजाद कर लिए है। जिन सामग्रियों की खपत ज्यादा है वह मिलावटखोरों के निशाने पर आ जाती है। सामान्य लोग इसे पकड़ नहीं पाते हैं। खान पान में प्रयुक्त होने वाली अधिकांश सामग्री मिलावट के साथ बिक रहे हैं। ठेले पर बिक रही बिरयानी के चावल में रंग चढ़ा है। उसमें चटनी का प्रयोग रसायनिक कर रहे हैं।
इससे ज्यादा दिनों तक उसके सेवन से सीधे लिवर को नुकसान पहुंच सकता है। बताते हैं कि रोल में भी सोयाबीन में मिलावट करके परोसा जा रहा है। जिसे महिलाएं, युवा वर्ग बड़े ही चाव से खा रहे। असल में यह धीमा जहर है। भटूरे से लेकर पूड़ी तक छानने के लिए एक ही तेल को नियमित प्रयोग करते हैं।
सरकारी अस्पताल के फिजिशियन कक्ष में पेट संबंधी आ रहे रोगियों में फैटी लिवर की शिकायतें बढ़ी हैं। डॉक्टरों के अनुसार, यह लिवर सिरोसिस के बढ़ने का संकेत है।खराब खाद्य पदार्थ और फास्ट फूड्स खाने से ऐसा होता है।
बताया गया कि अस्पतालों में चार से छह मरीज लीवर इंफेक्शन की शिकायत लिए रोजाना आ रहे हैं।
पेट रोग विशेषज्ञ डॉ इवा फरमान के अनुसार, पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में दर्द, थकान, भूख न लगना, कमजोरी, जी मिचलाना, लीवर का आकार बढ़ना, गर्दन और बाहों के नीचे की त्वचा में गाढ़े रंग का मेल जमा होना फैटी लीवर के संकेत हैं।
अल्कोहलिक फैटी लीवर की अवस्था शराब पीने वालों में होती है। गैर अल्कोहलिक फैटी लीवर शराब नहीं पीने वाले लोगों में होता है।—–
चावल, दूध उत्पाद में भी मिलावट विभिन्न तरह के दूध उत्पादों में भी मिलावट का धंधा जोरों पर है। खोवा में मैदे और अरारोट की मिलावट की जा रही है। सुगंध के लिए विशेष किस्म के इत्र भी मिलाए जाते हैं। सबसे अधिक बिकने वाला पनीर कृत्रिम ढंग से बनाया जा रहा है। इसके लिए कारोबारी विशेष तरह के सफेद लिक्विड से पहले बनावटी दूध तैयार करते हैं। इस दूध में रिफाइंड ऑयल मिलाकर पनीर तैयार कर दिया जाता है।
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इसी तरह बाजार में दाल और चावल भी कई किस्म के बेचे जा रहे हैं। सस्ते दर पर मिलने वाले अनाज में कंकर और पत्थर के महीन टुकड़े मिले रहते हैं। यह तो सिर्फ बानगी मात्र है इसी तरह सरसों तेल, नमकीन, ब्रेड, मक्खन आदि में भी मिलावट है।
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सेहत के लिए मिलावटी खाद्य पदार्थ नुकसानदेह – फिजीशियन डॉ. आरके वर्मा ने बताया कि मिलावटी खाद्य पदार्थ सेहत के लिए हर दृष्टिकोण से नुकसानदेह है। सब्जियों और फलों की ताजगी के लिए इस्तेमाल होने वाले रंग या केमिकल स्वास्थ्यवर्धक नहीं है। उसका कुछ न कुछ अंश आहार के रूप में शरीर में जाता है। इससे लिवर, किडनी पर बुरा असर पड़ता है।
इसके अलावा मिलावटी अनाज में कंकर, पत्थर होते हैं।
आमाशय में पहुंचने के बाद इनका पाचन नहीं हो पाता है। जिससे यह शरीर के विभिन्न आंतरिक हिस्सों में पथरी का रूप ले लेता है। मिलावटी खाद्य पदार्थों के सेवन के चलते ही लोगों की पाचन शक्ति कमजोर होती जा रही है।———-
उत्पादन कम और खपत अधिक –
उत्पादन कम और खपत अधिक होने का ही लाभ धंधेबाज उठाते हैं। वे गाय-भैंस के 10 लीटर दूध के साथ पाउडर से बना दूध भी उतनी ही मात्रा में मिला देते हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से बीते दिसंबर तक पनीर और खोवा के दर्जनों नमूने एकत्र किए गए।
इसमें से पनीर के तीन और खोआ के दो नमूनों की जांच रिपोर्ट मिली है। प्रयोगशाला से मिले पनीर के दो जांच रिपोर्ट के नमूने फेल मिले हैं। इसी तरह खोआ के मिले दो जांच रिपोर्ट में से एक नमूने की रिपोर्ट अधोमानक मिली है। इस जांच रिपोर्ट में फैट कम होने की पुष्टि हुई है।——–
क्रीम निकाल कर बिक्री कर रहे दूध – जानकारों के अनुसार मिलावटखोर दूध से क्रीम निकाल लेते हैं। कई मिलावटखोर पाउडर के दूध से पनीर तैयार करते हैं। पनीर और खोआ में चिकनाहट रहे इसके लिए उसमें रिफाइंड या पाम ऑयल मिलाकर तैयार कर देते हैं।
मांग बढ़ने पर धंधेबाज पानी तो मिलाते ही हैं अब पाउडर से बना दूध भी बाजार में बेच दे रहे हैं। पशुपालन विभाग के रिपोर्ट के मुताबिक जिले में दूध उत्पादन से ज्यादा खपत है। ऐसे में शुद्धता की गारंटी होना संभव नहीं है। यही हाल पनीर और दूध से बने खाद्य पदार्थों का भी है।


राजेश वार्ष्णेय एमके।
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