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एसआईआर – कदम-कदम पर समस्याएं झेल रहे बीएलओ, काम के साथ फटकार का भी डर

उझानी बदांयू 29 नवंबर।

यूपी में एसआईआर की प्रक्रिया जारी है। यह काम बीएलओ के स्तर पर हो रहा है। बदांयू एक्सप्रेस ने बीएलओ से बात करके उनके सामने आने वाली समस्याओं को समझा।

एसआईआर फॉर्म भरवाकर जमा कराना बीएलओ के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। तमाम मतदाता इसकी अहमियत नहीं समझ रहे, तो बहुत से ऐसे भी हैं जो बीएलओ को समय पर फॉर्म भरकर नहीं दे रहे हैं। कई जगह बीएलओ से अभद्रता भी हुई। इन सभी परेशानियों और चुनौतियों के बावजूद तय समय में बीएलओ को काम पूरा करना है। वह किन स्थिति का सामना कर रहे हैं? क्या क्या परेशानियां आ रहीं हैं और वह उनसे कैसे निपट रहे हैं? जानने की कोशिश की।

नहीं समझ रहे महत्व, समझाओ तो भड़कते हैं उझानी के ग्रामीण
क्षेत्र में एसआईआर फॉर्म भरवा रहीं महिला बीएलओ ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में सबसे अधिक दिक्कत आ रही है। यहां मतदाताओं को एसआईआर फॉर्म के बारे में समझाना बड़ा ही चुनौतीपूर्ण काम है। कुछ समझ रहे तो कुछ भड़क रहे हैं, चूंकि सभी का फॉर्म भरवाना अनिवार्य है, इसलिए उनसे निवेदन तक करना पड़ रहा है। जो मतदाता गांव के बाहर अन्य राज्यों में नौकरी कर रहे हैं, ऐसे मतदाताओं की जानकारी जुटाने में दिक्कत आ रही है।

उझानी शहर में काम कर रहे एक बीएलओ ने बताया कि सभी मतदाताओं के पास फॉर्म तो पहुंच गए हैं, लेकिन जमा करने में देरी कर रहे हैं। एक-एक घर जाकर फॉर्म कलेक्ट करना भी बड़ा काम है। हालांकि, ऐसा करना पड़ रहा है, क्योंकि समय बहुत कम है। बीएलओ ने बताया कि तमाम मतदाता अधूरा फॉर्म भरकर दे रहे हैं। ऐसे में काफी समय जाया हो रहा है। खुद से फॉर्म भरना पड़ रहा है।

प्रत्येक बीएलओ को कम से कम एक हजार मतदाताओं का फॉर्म भरवाकर जमा करना है। जिस भी बीएलओ से बात करो, वह यह जरूर कहता है कि 30 दिनों में इतने मतदाताओं से संपर्क कर फॉर्म भरवाना और फिर जमा करवाना बहुत ही टेढ़ी खीर है। इसमें सभासद राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं की मदद भी ली जा रही है। लक्ष्य पूरा न होने पर अधिकारियों की फटकार का डर भी रहता है।

जो शिक्षक बीएलओ के रूप में काम कर रहे हैं, उनमें से तैनात बीएलओ ने बताया कि दवाइयां खाकर काम करना पड़ रहा है। एक घंटा स्कूल में पढ़ाना भी है और फिर फॉर्म भी भरवाने हैं। व्यक्तिगत जीवन भी प्रभावित हो रहा है। देहात के बीएलओ ने बताया कि संसाधन की कमी है। तमाम लोग घरों में नहीं मिल रहे हैं। कृषि के काम में लगे हैं। ग्रामीणों से फाॅर्म भरवाना सबसे बड़ा काम है।

शहर के एक बीएलओ ने बताया कि एप सही से काम नहीं करता, जिससे अपडेट करने में दिक्कत होती है।

राजेश वार्ष्णेय एमके

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