6:21 pm Monday , 20 July 2026
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उझानी में बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे 50 से ज्यादा कोचिंग सेंटर।

पंजाबी कालोनी बना कोचिंग हब।

किसी भी सेंटर के पास अग्निशमन विभाग की एनओसी नहीं।

उझानी बदांयू 6 अक्टूबर।

फर्रुखाबाद में बिना पंजीकरण संचालित कोचिंग सेंटर के पास हुए भीषण विस्फोट की घटना ने एक बार फिर व्यवस्था पर सवाल किए हैं। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक बिना पंजीकरण कोचिंग सेंटरों की भरमार है। तंग गलियों के साथ दो मंजिला इमारतों और बेसमेंट में कोचिंग सेंटर संचालित हैं। ज्यादातर सेंटरों में सुरक्षा मानकों का बुरा हाल है।

डीआईओएस कार्यालय के आंकड़ों पर गौर करें तो अभिलेखों में सिर्फ एक दर्जन सेंटरों का ब्योरा मिला। सूत्र बताते हैं उझानी में मौजूद समय सिर्फ एक सेंटर ही शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त है, लेकिन अग्निशमन विभाग का एनओसी किसी के पास नहीं है। धरातल पर यह सभी सेंटर संचालित हैं। अब डीआईओएस व अग्निशमन अधिकारी ने जांच और नोटिस जारी करने की बात कही है।

शहर में पंजाबी कालोनी पूरी तरह कोचिंग हब बना चुका है, स्टेशन रोड, साहूकारा, अयोध्या गंज, बाजार कलां सहित घरों और गोदामों में कोचिंग सेंटर खुले हैं।शहर में छोटे-बड़े करीब 50 से अधिक कोचिंग सेंटर हैं।

इन कोचिंग सेंटरों में कक्षा छह से प्रतियोगी परीक्षाओं तक की तैयारी कराई जाती है। घनी बस्तियों में संचालित कोचिंग सेंटरों की स्थिति यह है कि यहां अगर आग लग जाती है तो दमकल का पहुंचना भी मुश्किल है।

डीआईओएस कार्यालय के मुताबिक, कोचिंग का पंजीकरण तीन साल के लिए मान्य होता है। 50 छात्र संख्या पर दस हजार रुपये शुल्क जमा होता है। कोचिंग संचालक फार्म भरकर डीआईओएस कार्यालय में जमा करेंगे। वहां से उसे एक कोड दिया जाएगा। उसी कोड नंबर के आधार पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में जाकर शुल्क जमा करना होगा। कोचिंग संचालन के लिए भवन होना चाहिए। कोचिंग में अध्ययन सामग्री की व्यवस्था हो। पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित स्टॉफ होना जरूरी है। फर्रुखाबाद की घटना के बाद डीआईओएस कार्यालय अब इन अवैध कोचिंग सेंटरों की जांच करने की बात कह रहा है।

राजेश वार्ष्णेय एमके।

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