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उझानी में जमीन सरकारी, किराया वसूलते प्राइवेट लोग

नगर पालिका की अनदेखी के चलते सरकारी जमीन पर 10 से 15 फिट तक बनी बिल्डिंग। फुटपाथ पर किराएदारों का कब्जा।

उझानी बदांयू 18 जून।

हे ना उझानी नगरी में कमाल – जो जमीन सरकार की है उस पर किराएदारों से किराया वसूलते हैं प्राइवेट लोग। बर्षो से सब-कुछ जानने के बाद भी जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी से कन्नी काटते नजर आते हैं। वज़ह तो वहीं जाने।

बताते चलें कि नगर की पुरानी अनाज मंडी में काफी पहले किसानों की डनलप, बैलगाड़ी, ट्रैक्टर आदि खड़े करने को नगर पालिका परिषद ने आढ़तियों को उनकी आढत के सामने पड़ी सरकारी जमीन 99 साल के पट्टे पर सिर्फ प्रयोग वास्ते, निर्माण को नहीं आवंटित की। पहले ज्यादातर किसान अपनी उपज को बैलगाड़ी ,घोड़ा बुग्गी,डनलप से बेचने को मंडी में आते थे। जानवरों को पानी पीने को होदे भी बनाई गई थी। जिनका अब नामोनिशान मिट चुका है।

नगरपालिका को लाखों रुपए महीने का नुक़सान, किराया वसूलते प्राइवेट लोग।
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नगर पालिका की जमीन पर जानवरों के भूसा बेचने वालों के फड,चना परमल,गुड, अनाज के फड, चाट-पकौड़ी के ठेले, सब्जी व फल के ठेले, परचून, रेडीमेड कपड़े,दाल बूरा बतासे के बड़े बड़े खोके रखवाकर दो हजार से दस हजार रुपए महीने तक किराया प्राइवेट लोग बसूल करते हैं, इससे नगर पालिका को लाखों रुपए माहवार का नुक़सान होता है।———————

पुरानी अनाज मंडी 30 साल पहले शिफ्ट हो चुकी है बारा पत्थर पर।

किसी जमाने में नगर की अनाज मंडी की प्रदेश में पहचान हुआ करती थी, मूंगफली आलू, के लिए प्रदेश में अलग ही पहचान थी,उस वक्त भी जगह की कमी से सरकार ने 30 बर्ष पहले उसे बारा पत्थर बाइपास पर कृषि उत्पादन मंडी परिसर में शिफ्ट करा दिया था।
———————— सरकारी जमीन पर 10 से 20 फ़ीट तक पक्के निर्माण, जिम्मेदार खामोश ?******

नगर पालिका प्रशासन की अनदेखी के चलते जहां फड पर किराएदारों को बसा दिया है वहीं पीछे की साइड में लोगों ने 10 से बीस फिट तक पक्के निर्माण कर अपनी अपनी दुकानें संचालित कर रहे हैं।

दो बार बाजार बनने का आ चुका है प्रस्ताव ?***** पुरानी अनाज मंडी को विकसित कर मार्केट बनाने को दो बार प्रस्ताव आ चुका है लेकिन किन्हीं कारणों से उसे वापस कर दिया गया। अगर दुकानें बन जाऐ तो सेकडो बेरोजगारों को रोजगार के साथ ही नगर पालिका की आमदनी में इजाफा हो सकता है

राजेश वार्ष्णेय एमके।

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