वेद कथा का पांचवा दिन बिल्सी,आर्य समाज के तत्वावधान में ग्राम गुधनी में चल रही वेद कथा के पांचवें दिन वेद कथाकार आचार्य संजीव रूप ने गृहस्थ आश्रम की चर्चा करते हुए कहा “विवाह एक संस्था है जिसके दो सदस्य होते हैं पति और पत्नी । जिस प्रकार हर संस्था …
Read More »बदायूं – श्री रघुनाथ जी (पंजाबी) मंदिर में धूमधाम से मनाया गया श्री राधा अष्टमी महोत्सव
बदायूं। श्री रघुनाथ जी (पंजाबी) मंदिर में रविवार को श्री राधा अष्टमी महोत्सव बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धा-भाव के साथ मनाया गया। भजनों और संकीर्तन की गूंज से पूरा वातावरण भक्ति रस में डूब गया और दृश्य मानो वृंदावन धाम का आभास कराने लगा। महोत्सव में श्री सुंदरकांड कमेटी, श्री …
Read More »मेरे अंदर – Sugandha Sharma
Sugandha Sharma जितने अहसास हैं मेरे अंदर, तुम्हारे लिए…! उतने तो शब्द भी नहीं होते किताबों में…!! लिपटी रहती हैं तुम्हारी यादें… यूं मेरे अहसासों से!! जैसे… रूह लिपटी रहती है ज़िन्दग़ी भर सांसों से । #सुप्रभात_जिंदगी #सुगंधा #हर_हर_महादेव
Read More »जब घर से- Pushpa
Pushpa जब घर से बाहर निकलोगे, तो माँ की कीमत समझ में आएगी…… और जब कमाने लगोगे, तो पिता की अहमियत समझ में आएगी……
Read More »उम्र- Laxmi Singh
Laxmi Singh उम्र का बढ़ना तो, दस्तूर ए जहां है … 🖤 महसूस ना करो तो, बढ़ती कहा है… #love
Read More »न पूछ मुझसे – Ravina Mishra
Ravina Mishra न पूछ मुझसे मेरे ख्वाबों की ताबीरें, हर एक सपना तेरा चेहरा बन जाता है। लिखूं कैसे तुझ पे ग़ज़लें मैं, हर लफ्ज़ में तू ही तू नजर आती है। 💕
Read More »जो सच मे- Queen
Queen जो सच मे प्रेम करते हैं वो न तो प्रेम की नुमाइश करते हैं और न ही बदनाम करते हैं, मिले या न मिले फर्क नहीं पड़ता, प्रेम है और हमेशा रहता है – प्रेम भी और इंतजार भी- सदैव रहता है– हमारे जाने के बाद भी – है …
Read More »झांक के – nutan Tiwari
nutan Tiwari 😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁कुछ लोग तो मेरी पोस्ट कों ऐसे …. झांक के भाग जाते हैं … जैसे पुराने ज़माने में बहुएँ अपने ….. ससुर कों देख के भागती थी! 😝😝😝😝🫣🫣🫣🫣🤣🤣🤣 क्यों सही कहा ना मैंने 😃🤣🤣
Read More »ना चाहो फिर भी – Rinku Sharma
Rinku Sharma ❣️ना चाहो #फिर भी #इश्क़ , #इंसान को #दीवाना बना #देता हैं….,🍂 ❣️#अजीब खेल है ये #ऊपर वाले #का #दिल तो देता हैं #मगर, #धड़कन किसी और को #बना देता हैं..🍂 ❣️ #राधे #राधे ❣️
Read More »आजकल – Gunjan Agrawal
Gunjan Agrawal आजकल वो शब्द नहीं मिल रहे, जिससे गढ़ सकूं मैं एक सुंदर कविता.. जो बिल्कुल तुम्हारा ही प्रारूप हो अजनबी..!!! गुंजन शिशिर/
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