Gunjan Agrawal आजकल वो शब्द नहीं मिल रहे, जिससे गढ़ सकूं मैं एक सुंदर कविता.. जो बिल्कुल तुम्हारा ही प्रारूप हो अजनबी..!!! गुंजन शिशिर/