उझानी: 30 मिनट की बारिश, 20 साल का सिस्टम फेल,
नालों की सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति, जलभराव से त्रस्त हुआ शहर।
उझानी-बदांयू 5 अगस्त।
मानसून की पहली तेज बारिश ने ही नगर पालिका के दावों की हवा निकाल दी। महज 30 मिनट की बारिश में पूरा उझानी शहर तालाब बन गया। दुकानों में पानी घुसा, घरों में कीचड़ भर गया और सड़कों पर नालियों का गंदा पानी सैलाब की तरह बहता रहा।
नगर पालिका प्रशासन हर साल नालों की सफाई पूरी का राग अलापता है। लेकिन बुधवार की बारिश ने सबूत दे दिया कि जमीनी स्तर पर कुछ नहीं हुआ। नाले कचरे से अटे पड़े हैं, नालियां जाम हैं। नतीजा – आधे घंटे की बारिश भी शहर नहीं झेल पाया।
मुख्य बाजार से लेकर मोहल्लों तक हर जगह पानी भर गया। लोग अपने घरों और दुकानों से पानी निकालते रहे, वहीं जिम्मेदार अधिकारी एसी कमरों में बैठे तमाशा देखते रहे।
स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। हर महीने हाउस टैक्स, वाटर टैक्स देते हैं। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे। और बारिश आते ही शहर डूब जाता है।
नालों की सफाई के नाम पर लाखों का बजट पास होता है, टेंडर होते हैं, कागजों पर सब ओके है पर धरातल पर सिफर।
अगर समय रहते नालों की सफाई और ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त किया गया होता तो आज ये हालात न होते। बीमारियां फैलने का खतरा अलग। बच्चों और बुजुर्गों का घर से निकलना मुश्किल।
क्या नगर पालिका ईओ को शहर की इस दुर्दशा की कोई जवाबदेही है? या अगली बारिश का इंतजार करके फिर से लीपापोती की जाएगी? उझानी की जनता अब सिर्फ आश्वासन नहीं, एक्शन चाहती है।






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