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उझानी में बेसहारा पशुओं का आतंक: सड़क से खेत तक बेहाल शहरवासी और किसान

उझानी-बदांयू 10 जुलाई।

उझानी कस्बे और आसपास के गांवों में बेसहारा पशुओं की समस्या अब बेकाबू हो गई है। सड़कों, बाजारों और खेतों में गाय, सांड़ के झुंड की वजह से न सिर्फ आमजन का निकलना मुश्किल हुआ है, बल्कि किसानों की फसलें भी रोजाना बर्बाद हो रही हैं। शिकायतों के बावजूद सालों से कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है।

मुख्य बाजार, बस स्टैंड , स्टेशन रोड, सब्जी मंडी स्थित आंबेडकर पार्क, साहूकारा के आसपास दिनभर 30 से 40 बेसहारा पशु बैठे रहते हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत मोहल्ला साहूकारा, धोबी गली व सब्जी मंडी में है।

स्टेशन रोड के दुकानदार संजय, गोवर्धन और राजीव गोयल का कहना है कि ग्राहक जब बाइक खड़ी करते हैं तो सांड़ सींग मार देते हैं। कई लोग अब तक पशुओं के हमले का शिकार बन चुके हैं। सुबह और शाम घर से निकलना भी जोखिम भरा हो गया है।

किसानों की मुसीबत सबसे ज्यादा है। रामसिंह, बलराज और हिम्मत जैसे किसान बताते हैं कि पशुओं के झुंड रात में खेतों में घुसकर फसल चट कर जाते हैं। फसल बचाने के लिए उन्हें पूरी रात जागकर रखवाली करनी पड़ रही है। नुकसान होने पर कोई मुआवजा नहीं मिलता। मजबूरी में कई किसानों ने खेतों के चारों ओर कंटीले तार लगवाए हैं, जिससे खेती की लागत बढ़ गई है।

नगर पालिका ईओ मणीजी सैनी ने कहा कि समस्या से पूरी तरह वाकिफ हैं। पहले भी टेंडर के जरिए पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में भेजा गया था, लेकिन कुछ ही दिन में फिर संख्या बढ़ गई।

उन्होंने पशुपालकों से अपील की कि दूध निकालने के बाद पशुओं को खुले में न छोड़ें, उन्हें बांधकर रखें। बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए जल्द नई रणनीति बनाकर कार्रवाई की जाएगी।

क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए तुरंत टेंडर जारी किया जाए और उन्हें गोशालाओं में भेजा जाए। साथ ही जो पशुपालक अपने पशुओं को खुला छोड़ते हैं उन पर कड़ा जुर्माना लगाया जाए, ताकि आमजन और किसानों को राहत मिल सके।

— राजेश वार्ष्णेय एमके

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