6:25 pm Sunday , 19 July 2026
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अब पछताये होत क्या..?

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🪷अब पछताये होत क्या..? 🪷
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चलिये गोविन्द जी गाड़ी तैयार हैँ….!
हां चल तो रहे हैँ…… संजय जी! लड़के वालों के घर…।
पर मन बहुत दुविधा में है- कि लड़की कहीं गलत जगह ना फंस जायें…!
जैसा तुमने बताया- कि लड़के वाले किराये के घर में रहते हैँ….! दो बेटी दो बेटे हैँ….! कोई बाप दादाओं की कमाई भी नहीं हैँ….!
ऊपर से लड़का भी कुछ नहीं करता अभी… आई.एएस. की तैयारी कर रहा हैँ प्रयागराज से….!
गोविन्द जी चिंता जताते हुए बोले:!
तो रहने दो फिर गोविन्द जी…! मन दुविधा में हैँ तो मत जाओ….!
पर एक बात कहे दे रहा हूँ…. वो तो बहुत भले लोग हैं- जो आपकी स्नातक पास लड़की को देखने को राजी हो गए हैँ…! लड़का मनोहर जी का दो साल से हर बार प्री का पेपर पास कर जाता है…! बस मेंस में पिछली बार 4 नंबर से रहा…! अबकि बार 1नंबर से….! उसे अधिकारी बनने से कोई नहीं रोक सकता…बचपन से ही ज़िले में टॉप करता आया हैँ….वो तो बेटियां शादी करके ससुराल चली गयी हैँ… भाभी जी आयें दिन बिमार हो ज़ाती हैँ. …. बेड पकड़ लेती हैँ…. इसलिये घर संभालने के लिए एक संस्कारी सुलझी हुई बहू चाहिए उन्हे….. कोई मांग भी नहीं हैँ उनकी…! वो तो मेरे कहने पर आप लोगों से बात करने को राजी हो गए हैं….!
तो मांग होगी भी क्यूँ छोरे वालो की……? लड़का कुछ करें ना हैं अभी….! ना ही खुद का घरबार है……!
तो हमारी मुस्कान तो लड़के से बीस ही बैठेगी…
हां नहीं तो- कह रहे…हैं- कोई मांग नहीं है..!
गोविन्द जी की पत्नी अनीता मुंह चिढ़ाते हुए बोली….!
तो फिर रहने दीजिये …! मेरा और अपना- समय खराब मत कीजिये ….चलता हूँ…।बिचौलिय़ा संजय बोला:….!
वैसे अनीता- कह तो सही रही हैँ…एक बार जाने में कोई हर्ज नहीं….!
सुनिये जी…!! इनके यहां- वो हजार रूपये किलो वाली पन्नी वाली मिठाई ले जाने की ज़रूरत नहीं…है! कभी देखी भी नहीं होगी उन्होंने….!
वो सामने मंगल हलवाई की- 300/-रूपये किलो वाली ले जाना…!
अनीता जी- पति गोविन्द के कान में बुदबुदायी….!
ठीक हैँ भाग्यवान …!अब निकलने भी दो हमें….!
संजय और गोविन्द जी मनोहर जी के घर आ गए….!
मनोहर जी ने दोनों से राम राम कर उनका आदर सत्कार किया….! तरह तरह के नाश्ते रखे मेज पर….बहुत ही सभ्य लग रहे थे- सब….!
लड़का संतोष भी आया… दोनों को नमस्ते कर- उनके पैर छुये उसने….!
हां तो बेटा….! अगर इस बार नहीं हो पाय़ा मेंस- तो कोई और नौकरी की तैयारी कर लेना- य़ा प्राईवेट नौकरी कर लेना…! कब तक इसके पीछे भागोगे….?
गोविन्द जी अपने बेटी के भविष्य की चिंता करते हुए बोले…!
और वो बिना एक अठन्नी खर्च किये ही- बेटी को ब्याहने का सोचे बैठे थे….!
नहीं अंकल…! अभी मेरी एज ही क्या हैँ…? ओनली ट्वेंन्टी फोर…! इस बार तो क्वालिफाई होना ही हैँ… आई एम डेम श्योर….! संतोष पूरे आत्म विश्वास से बोला….!
बस ये शब्द ही गोविन्द जी के अहंकार को छू गए।
बहुत देखे हैँ तुम्हारे जैसे- डेम श्योर वाले..? आई.एएस. बनना कोई हलवा हैँ…..? लोगों की सात पुश्ते निकल ज़ाती हैं- पर अधिकारी एक भी नही बन पाता…..! मन ही मन गोविन्द जी बुदबुदाये ….!
मनोहर जी के घर की- बहुत ही सामान्य हालात देख…!
कुछ भी हाई फाई नहीं था उनके यहां…..! बिना रिश्ता किए- गोविन्द जी घर लौट आयें….!

लेकिन 6 महीने बाद ही- मनोहर जी का लड़का आई.एएस. बन गया….!
छोटा सा किराये का घर अब बंगले में बदल गया….!
गए थे- गोविन्द जी- सकुचाते हुए फिर से बिटिया का रिश्ता लेकर….! पर मनोहर जी उनके आने से दो महीने पहले ही एक बहुत ही सामान्य घर की- बिन माँ की बेटी को अपनी बहू बनाने का वचन दे चुके थे….!
जिस पर वो अडिग थे…! साफ साफ कह दिया मनोहर जी ने- तब आपने हमें गरीब समझ ना कह दी तो हम आगे बढ़ गए….! बाकी आपकी बेटी को और अच्छा रिश्ता मिलें यहीं कामना हैँ……!
बेचारे गोविन्द जी उल्टे पांव लौट आयें थे….! अब 30 लाख भी खर्च करने को तैयार हैं- गोविन्द जी! बिटियां की शादी के लिए..!
पर मनोहर जी जैसा घरबार और लड़का उन्हे नहीं मिल रहा हैँ…! लड़की की भी ऊमर निकली जा रही….
अब पछताये होत क्या…? काश समय रहते दूर की सोच लेते गोविन्द जी- तो आज़ अधिकारी की पत्नी होती उनकी बिटिया….!
🌸 जय श्री राधे 🌸

🪴।।जय जय श्री राम।। 🪴
🪷 ।।हर हर महादेव।। 🪷

गूगल से साभार

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