‘अहंकार’
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सुन्दर घने वन में खड़े एक वृक्ष के साथ लिपटी एक लता धीरे – धीरे वृक्ष के बराबर ऊँची हो गई। वृक्ष का आश्रय पाकर उसने भी फलना – फूलना आरंभ कर दिया। यह सब देखकर वृक्ष अहंकार से भर उठा। उसे लगने लगा कि यदि वह नहीं होता तो लता का अस्तित्व ही न होता
एक दिन वृक्ष ने उस लता से धमकाते हुए बोला – “सुन! चुपचाप जो मैं कहता हूँ उसे किया कर, वरना धक्के मारकर तुझको भगा दूँगा।” तभी उस रास्ते पर आ रहे दो पथिक वृक्ष की खूबसूरती देखकर रूक गये। एक पथिक अपने दूसरे साथी पथिक से कह रहा था कि – भाई! ये वृक्ष तो अत्यंत सुन्दर लग रहा है, इस पर जो सुंदर बेल पुष्पित हो रही है उसकी वजह से तो ये और भी सुंदर लग रहा है । इसे देख कर तो मेरी बड़ी इच्छा हो रही है की इसके नीचे बैठकर कुछ देर विश्राम करू।
वृक्ष उनकी बातें सुनकर बड़ा लज्जित हुआ। उसे इस बात का एहसास हो गया कि उस का महत्व लता के साथ है उसके बिना नहीं।
अहंकार की कहानी से सीख Moral Of Ahankar Ki Kahani : इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि साथ साथ रहने से ही सबकी प्रगति होती है। मनुष्य को कभी अपने ऊपर अहंकार नहीं करना चाहिए |
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गूगल से साभार
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