बदायूं
कांवड़ यात्रा व संक्रामक रोगों से निपटने को ऑक्सीजन प्लांटों की मॉकड्रिल, चालू मिले तीनों प्लांट, फिर भी सिलेंडरों से हो रही सप्लाई
केशव गुप्ता
बदायूं। कांवड़ यात्रा और संभावित संक्रामक रोगों के मद्देनज़र शासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने गुरुवार को जनपद के अस्पतालों में स्थापित ऑक्सीजन प्लांटों की व्यापक मॉकड्रिल कर तैयारियों का जायजा लिया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. विकास शर्मा के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम ने जिला अस्पताल और राजकीय मेडिकल कॉलेज पहुंचकर ऑक्सीजन प्लांटों की कार्यक्षमता, सप्लाई व्यवस्था और आपातकालीन तैयारियों का परीक्षण किया।
सीएमओ के साथ एसीएमओ डॉ. मोहन झा एवं एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. कौशल गुप्ता भी मौजूद रहे। सबसे पहले जिला अस्पताल में प्रभारी सीएमएस डॉ. रियाज अहमद की मौजूदगी में ऑक्सीजन प्लांट का निरीक्षण किया गया। मॉकड्रिल के दौरान प्लांट पूरी तरह चालू और सुचारू स्थिति में मिला। इसके बाद टीम राजकीय मेडिकल कॉलेज पहुंची, जहां चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विपिन कुमार की उपस्थिति में दोनों ऑक्सीजन प्लांटों का मॉक ट्रायल किया गया। अधिकारियों ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के दोनों प्लांट भी पूरी तरह संचालन योग्य पाए गए।
तीन प्लांट चालू, फिर भी सिलेंडरों से हो रही ऑक्सीजन सप्लाई
जनपद में कुल तीन ऑक्सीजन प्लांट स्थापित हैं—एक जिला अस्पताल में और दो राजकीय मेडिकल कॉलेज में। हैरानी की बात यह है कि तीनों प्लांट चालू होने के बावजूद दोनों प्रमुख अस्पतालों में मरीजों को ऑक्सीजन की आपूर्ति प्लांट के बजाय सिलेंडरों के माध्यम से की जा रही है। जबकि अस्पतालों में सेंट्रल ऑक्सीजन पाइपलाइन सिस्टम भी उपलब्ध है।
सीएमओ ने दी यह वजह
सीएमओ डॉ. विकास शर्मा ने बताया कि जनपद के सभी ऑक्सीजन प्लांट किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि प्लांटों को लगातार संचालित करने में अपेक्षाकृत अधिक खर्च आता है, इसलिए वर्तमान में ऑक्सीजन सप्लाई सिलेंडरों के माध्यम से की जा रही है।
व्यवस्था पर उठे सवाल
स्वास्थ्य विभाग की इस व्यवस्था को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि महामारी, दुर्घटना या किसी बड़े आपातकाल में प्लांट आधारित ऑक्सीजन सप्लाई अधिक तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद साबित हो सकती है। ऐसे में प्लांट उपलब्ध होने के बावजूद उनका नियमित उपयोग न होना भविष्य में चुनौती बन सकता है।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने मॉकड्रिल के माध्यम से अपनी तैयारियों को परखा और दावा किया कि जनपद में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए ऑक्सीजन व्यवस्था पूरी तरह तैयार है। हालांकि, प्लांटों के बजाय सिलेंडरों पर निर्भरता को लेकर चर्चा लगातार तेज होती जा रही है।
badaunexpress.com badaunexpress.com | www.badaunexpress.com

