10:53 pm Sunday , 19 July 2026
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शायर हिलाल बदायूँनी को पितृ शोक फाइल फोटो आले अहमद ज़ौक़

बदायूं

शायर हिलाल बदायूँनी को पितृ शोक
फाइल फोटो आले अहमद ज़ौक़

वज़ीरगंज ( बदायूँ ) । मशहूर शायर डॉ हिलाल बदायूँनी के पिता आले अहमद ज़ौक़ साहब के इंतेक़ाल पर समूची बस्ती व साहित्यकारों में शोक की लहर दौड़ गयी है । बताते चलें डॉ हिलाल बदायूँनी के पिता अपने वक़्त के श्रेष्ठ शायर रहे हैं एवं उनके बहुत से शेर मशहूर है

हक़ीक़त ज़िंदगी की इस जहां में ख्वाब है ऐ ज़ौक़
गुज़र जाता है जो लम्हा वो अफसाना सा लगता है

ग़मे हस्ती के अफसानों को दोहराया नहीं करते
कभी रंजो आलम में अश्क बरसाया नहीं करते

ज़ौक़ वज़ीरगंजवी का ताल्लुक़ उत्तर प्रदेश के ज़िला बदायूँ के क़स्बा वज़ीरगंज से था। अपने आबाई वतन की निस्बत से उन्होंने “वज़ीरगंजवी” तख़ल्लुस इख़्तियार किया। उनके घराने में इब्तिदा ही से अदब और शायरी का माहौल था, जिसने उनके ज़ौक़-ए-सुख़न को परवान चढ़ाया। उनकी यही अदबी विरासत उनके बेटे डॉ. हिलाल बदायूँनी ने आगे बढ़ाई, जो आज हिंदुस्तान के मारूफ़ शायर और नाज़िम-ए-मुशायरा हैं। ज़ौक़ वज़ीरगंजवी ने सादा, सलीस और आम-फ़हम ज़बान में ग़ज़लें, नज़्में और ढेर7 कहे हैं ।

शायर आले अहमद ज़ौक़ राममूर्ति अस्पताल बरेली में भर्ती थे । पिछले कुछ महीनों से चलने फिरने संबधी समस्या से पीड़ित थे जहां उनकी इलाज के दौरान हृदय गति रुकने से मृत्यु हो गयी । इधर बस्ती में सभी उनके व्यवहार से बहुत प्रभावित रहते थे । बुधवार दोपहर 3 बजे उनकी तदफीन पैतृक निवास के निकट क़ब्रिस्तान में अदा की गई । आले अहमद ज़ौक़ साहब की दो औलादें हैं जिनमे एक पुत्र मशहूर शायर डॉ हिलाल बदायूँनी व एक पुत्री मुरादाबाद में विवाहित है । इधर मरहूमा की तदफीन में सांसद पीए अनिल यादव , मशहूर क़व्वाल आरिफ सैदपुरी , मास्टर आफताब

डॉ हिलाल बदायूँनी ने अपने पिता को श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए कहा

बेक़रारी में मुब्तिला था मैं
ज़िंदगी भर न सो सका था मैं
नींद आई है क़ब्र में आकर
उम्र भर का थका हुआ था मैं

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