उझानी बेहाल – जाम ने तोड़ा दम, प्रशासन सो रहा कुंभकर्णी नींद।




हाइवे से गली तक जाम का राज, एंबुलेंस-मरीज तड़पे, पुलिस अफसर AC में, जनता धूप में।
उझानी-बदांयू 7 जुलाई।
जाम ने उझानी का दम घोंट दिया है। बरेली-मथुरा हाईवे हो या शहर की तंग गलियां, हर जगह वाहनों का रेला और प्रशासन की लापरवाही साफ दिख रही है। भीषण गर्मी में लोग सड़कों पर घंटों पसीने में सड़ रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अफसरों को कोई फर्क नहीं पड़ रहा।
बरेली मथुरा हाईवे स्थित मंडी समिति पर मक्के की आवक बढ़ते ही रोज का जाम तय है। ट्रैक्टर-ट्रालियों की मनमानी से बरेली-मथुरा रोड पर सुबह से शाम तक लंबा जाम लगा रहता है। जाम का असर सीधा बाइपास से होते हुए दिल्ली हाईवे तक पहुंच जाता है। पुलिस के जवान पसीना-पसीना होकर जाम खुलवाते हैं, लेकिन परिवहन विभाग द्वारा कोई स्थायी इंतजाम के नाम पर जीरो। जबकि नगर में ट्रेफिक सबइंस्पेक्टर की तैनाती के बावजूद कोई नजर नहीं आता।
छतुइया फाटक, कछला रोड बाजार, हलवाई चोक रोज जाम से जूझते हैं। अढौली फाटक दिन में 4-5 बार जाम की वजह से बंद हो जाता है। शर्म की बात ये है कि यहां एंबुलेंस में मरीज तड़पता रहे, पुलिस की जीप फंसी रहे, पर कोई अफसर गाड़ी से उतरकर ट्रैफिक संभालने को तैयार नहीं।
घंटाघर चोराहा, बिल्सी रोड, बदायूं रोड और अंदर की गलियों में दोपहर 2 बजे तक पैदल चलना भी मुश्किल। बाइक सवारों का बुरा हाल। मंडी वाला जाम इतना खतरनाक है कि रोडवेज बस और कार वाले गौशाला फाटक से कादर चौक का चक्कर काटें तो वहां भी 1 घंटे की लाइन।
स्कूली बच्चे लेट, मरीज रास्ते में, व्यापारी परेशान। लेकिन परिवहन विभाग और स्थानीय पुलिस दोनों बेपरवाह।
लोगों का गुस्सा चरम पर है। सवाल सीधा है – मंडी के लिए अलग समय, फाटकों पर ट्रैफिक पुलिस, नो-पार्किंग जोन… ये सब कब होगा?
अगर अब भी प्रशासन नहीं जागा तो उझानी को “जाम नगरी” का तमगा मिलने से कोई नहीं रोक सकता। जनता की मांग कि तत्काल ठोस एक्शन हो , वरना सड़कों पर उतरकर होगा विरोध।
— राजेश वार्ष्णेय एमके।
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