


उझानी-बदायूं, 27 जून।
जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शनिवार को उझानी में गोमाता को ‘राष्ट्रीय माता’ घोषित करने की मुहिम को नई धार दी। हाईवे स्थित बैंक्वेट हाल में आयोजित धर्मसभा में उन्होंने कहा-गोमाता केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि कृषि, अर्थव्यवस्था और भारतीय संस्कृति की रीढ़ है। गोमाता से ही भारत समृद्ध होगा।
सुबह कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे शंकराचार्य का संत-समाज, जनप्रतिनिधियों और सैकड़ों श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ स्वागत किया। पूरा परिसर ‘गोमाता की जय’ के उद्घोष से गूंज उठा और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
शंकराचार्य ने बताया कि गोमाता को राष्ट्रीय माता का दर्जा दिलाने के लिए देशभर में व्यापक जनजागरण चल रहा है। अब इसे विधानसभा स्तर तक ले जाया जाएगा ताकि हर गांव, हर घर तक यह संकल्प पहुंचे। उन्होंने कहा, गोसंरक्षण सिर्फ सरकार की नहीं हर नागरिक की जिम्मेदारी है। जब तक गो सुरक्षित नहीं, तब तक गांव और किसान भी सुरक्षित नहीं।
उन्होंने युवाओं से विशेष आह्वान करते हुए कहा कि नई पीढ़ी को गाय के आर्थिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक महत्व से जोड़ना जरूरी है।
कार्यक्रम में पूर्व विधायक हाजी बिट्टन, उदयवीर सिंह शाक्य, सुनील यादव समेत कई सामाजिक व राजनीतिक हस्तियां मौजूद रहीं। सभी ने शंकराचार्य के अभियान को समर्थन देने का संकल्प लिया।
— राजेश वार्ष्णेय एमके।
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