उझानी: कागजों में प्रतिबंध, बाजार में खुलेआम बिक रही प्रतिबंधित पॉलिथीन।
उझानी-बदांयू 16 जून।
प्रतिबंधित पॉलिथीन पर कार्रवाई के तमाम सरकारी दावों के बावजूद उझानी के बाजारों में इसका इस्तेमाल धड़ल्ले से हो रहा है। सब्जी मंडी से लेकर किराना दुकानों तक ग्राहकों को सामान प्रतिबंधित पॉलिथीन में ही थमाया जा रहा है। वहीं नगर पालिका की कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आ रही है।
मंगलवार को शहर के प्रमुख बाजारों में पड़ताल की गई तो तस्वीर साफ दिखी। स्टेशन रोड, हलवाई चौक, सब्जी मंडी और बस स्टैंड के पास फल-सब्जी विक्रेता खुलेआम प्रतिबंधित पॉलिथीन में सामान दे रहे थे। किराना व्यापारी भी ग्राहकों को पॉलिथीन में ही दाल-चावल तौल रहे थे। दुकानदारों का कहना है कि सस्ती होने के कारण ग्राहक खुद पॉलिथीन मांगते हैं।
नगर पालिका के आंकड़े बताते हैं कि जनवरी से अब तक पॉलिथीन के खिलाफ कोई अभियान नहीं चलाया गया,जबकि हकीकत यह है कि रोजाना कई किलो पॉलिथीन बाजार में खप रही है।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार पॉलिथीन से होने वाले नुकसान गंभीर हैं- जमीन बंजर पॉलिथीन मिट्टी की उर्वरा शक्ति खत्म कर देती है- जहरीली हवा इसे जलाने से डाइऑक्सिन जैसी विषैली गैसें निकलती हैं जो सांस और त्वचा रोग बढ़ाती हैं- नाले जाम पॉलिथीन नालियों में फंसकर जलभराव की बड़ी वजह बनती है।
कचरे का अंबार टियर-3 शहरों में हर साल 5500 से 6000 टन प्लास्टिक कचरा निकलता है, जिसमें 70% हिस्सा पॉलिथीन का होता है।
कागजों पर प्रतिबंध और जमीन पर खुला इस्तेमाल, यही कहानी हर शहर की बन गई है। जब तक मांग-आपूर्ति की चेन नहीं टूटेगी, पॉलिथीन पर रोक सिर्फ आदेश बनकर रह जाएगी।
— राजेश वार्ष्णेय एमके।

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