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उझानी से दिल्ली तक उत्सव का आलम: मंत्री बीएल वर्मा की बेटी दीक्षा ब्याही जाएंगी लेह में तैनात कैप्टन अजय सिंह संग

उझानी से दिल्ली तक उत्सव का आलम: मंत्री बीएल वर्मा की बेटी दीक्षा ब्याही जाएंगी लेह में तैनात कैप्टन अजय सिंह संग।

उझानी-बदांयू 14 जून।

उझानी की धरती इन दिनों उल्लास से आप्लावित है। केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा के आंगन में मंगल-ध्वनि गूंज रही है। उनकी चौथे अंक की लाडली पुत्री दीक्षा वर्मा का पाणिग्रहण संस्कार 17 जून को दिल्ली की पावन भूमि पर, भारतीय सेना के वीर कैप्टन अजय सिंह के संग सम्पन्न होगा।

विवाहोत्सव का शुभारम्भ उझानी स्थित एपीएस इंटरनेशनल स्कूल परिसर में मंडप रस्म के साथ हुआ। सम्पूर्ण परिसर श्वेत गुलाब, गेंदे के पुष्पों और चमकते झूमरों से श्रृंगारित किया गया। मानो धरा ने भी दुल्हन का शृंगार ओढ़ लिया हो। इस मंगल बेला में लगभग 4 से 5 सहस्र अतिथियों के पदार्पण का अनुमान है। दातागंज के विधायक राजीव सिंह ने भी पधार कर नव-युगल को आशीष दिया। झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार के आगमन की मधुर अटकलों से सियासी गलियारे भी सरगर्म हैं।

अतिथि सत्कार में कोई कमी न रहे, इसलिए 200 से अधिक प्रकार के सुस्वादु व्यंजनों की व्यवस्था की गई। चाट से मिष्ठान्न तक, हर पटल पर स्वाद का वैभव बिखरा है। स्वयं राज्यमंत्री बीएल वर्मा प्रत्येक व्यवस्था का सूक्ष्म निरीक्षण कर रहे हैं।

दीक्षा का वरण जिस पुरुष-रत्न से हो रहा है, वह साधारण नहीं। वर कैप्टन अजय सिंह वर्तमान में लेह की दुर्गम घाटियों में “हार्ड कोर” में तैनात हैं। माइनस तापमान में भी मातृभूमि की रक्षा में तत्पर यह वीर मूलतः झांसी के हैं। इनके पिता अशोक सिंह राजपूत प्रतिष्ठित व्यवसायी हैं। ओरछा की पवित्र भूमि पर, रामराजा सरकार के सानिध्य में, दो मास पूर्व इनकी सगाई सम्पन्न हुई थी। अब दिल्ली में सात फेरे लेकर यह पावन बंधन अटूट होगा।

केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा का कुटुम्ब भी विशाल है। ईश्वर ने उन्हें पाँच कन्याओं और दो पुत्रों का सुख दिया है। पुत्रियाँ हैं – प्रतीक्षा, समीक्षा, आकांक्षा, दीक्षा एवं साक्षी। प्रत्येक नाम मानो एक आशा, एक संकल्प। ज्येष्ठ पुत्र प्रभात राजपूत केंद्रीय उपभोक्ता भंडारण निगम में निदेशक पद को सुशोभित कर रहे हैं और भारतीय जनता युवा मोर्चा में भी दायित्व निर्वहन कर चुके हैं। कनिष्ठ पुत्र हर्ष राजपूत भी पिता की कीर्ति-पताका को आगे बढ़ा रहे हैं।

उझानी के जन-जन के मुख पर एक ही चर्चा है: “हमारी बिटिया फौजी अफसर की अर्धांगिनी बनेगी, इससे बड़ा गौरव क्या होगा?” लेह की बर्फीली वादियों से उझानी के आंगन तक और फिर दिल्ली के मंडप तक, यह संबंध केवल दो आत्माओं का नहीं, अपितु एक राजनेता और एक सैनिक परिवार के पावन मिलन का प्रतीक है।

17 जून को जब दिल्ली में मंगल-घड़ी आएगी, तब उझानी से उठी शुभकामनाएँ वहाँ के आकाश को भी आलोकित कर देंगी। सरहद का रखवाला अब उझानी का दामाद बनने जा रहा है।

राजेश वार्ष्णेय एमके।

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