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विश्व पर्यावरण दिवस: धरती की हरी चुनरी, जीवन का पहला गहना।

बदायूं

विश्व पर्यावरण दिवस: धरती की हरी चुनरी, जीवन का पहला गहना।

उझानी-बदांयू 5 जून।

कैलेंडर की एक तारीख नहीं, ये धरती माँ का जन्मदिन जैसा है। और इस माँ का सबसे सुंदर श्रृंगार हैं – पेड़-पौधे। जिनकी गोद में हमारी सांसें पलती हैं, जिनकी छांव में हमारे रिश्ते पनपते हैं।

आज विश्व पर्यावरण दिवस पर, हम सब मिलकर इन हरे-भरे रक्षकों की सलामती की दुआ मांगते हैं। क्योंकि अगर ये नहीं रहे, तो हम भी नहीं रहेंगे।

*पेड़ क्या हैं? सिर्फ लकड़ी नहीं…*

पेड़ वो कविता है जिसे धरती ने आसमान को लिखी है।
वो नीम का पेड़, जो दादी-नानी के नुस्खों का डॉक्टर है।
वो बरगद, जो सैकड़ों राहगीरों का बस स्टॉप है।
वो आम का पेड़, जिसके नीचे बचपन की छुट्टियां बीतती हैं।
वो तुलसी का पौधा, जो आंगन का सबसे छोटा मंदिर है।

NASA कहता है कि एक बड़ा पेड़ दिन में 100 किलो ऑक्सीजन देता है – यानी 4 परिवारों की सांसें। बदले में वो हमसे क्या लेता है? थोड़ी सी जगह और कभी-कभी एक लोटा पानी। इतना सस्ता सौदा तो कोई व्यापारी भी नहीं करता।

*हमने क्या खो दिया? एक कड़वा सच*

हमने विकास के नाम पर पेड़ों को ‘बाधा’ समझा। सड़क चौड़ी करनी थी – पेड़ काट दिया। मॉल बनाना था – बाग उजाड़ दिया।
नतीजा आपके सामने है। दिल्ली 49°C पर जल रही है। चेन्नई डूब रहा है। शिमला में पंखे चल रहे हैं।

हम AC की हवा खरीद सकते हैं, पर वो सुकून नहीं जो नीम की छांव में लेटकर आता है। हम ऑक्सीजन सिलेंडर खरीद सकते हैं, पर वो खुशबू नहीं जो बारिश के बाद मिट्टी से उठती है।

पेड़ कटने से सिर्फ तापमान नहीं बढ़ता, संवेदनाएं मरती हैं। वो बच्चा जो कभी पेड़ पर चढ़ा ही नहीं, वो तितली और तोते का फर्क कैसे समझेगा?

*अब क्या करें? ‘श्रृंगार बचाओ अभियान’*

सिर्फ स्टेटस लगाकर पर्यावरण नहीं बचेगा। हमें ‘ग्रीन वॉरियर’ बनना होगा। 5 काम जो आज से ही शुरू कर सकते हैं:

जन्मदिन वाला पेड़-अपनी, बच्चों की, माँ-बाप की बर्थडे पर केक के साथ एक पौधा भी लगाओ। 50 साल में 50 पेड़। सोचो, कितनी बड़ी विरासत होगी।

पेड़ को परिवार मानो- अपने गली-मोहल्ले का एक पेड़ गोद ले लो। उसका नाम रखो। गर्मी में पानी दो। राखी वाले दिन उसे भी राखी बांधो। जब रिश्ता बनेगा, तो कटने नहीं दोगे।

बीज बम बनाओ- मिट्टी + गोबर + नीम, बबूल, जामुन के बीज। इनकी छोटी गोलियां बनाकर सूखा लो। सफर में जहां बंजर जमीन दिखे, फेंक दो। पहली बारिश में वो जिंदगी बन जाएगी। बच्चे इसे खूब एंजॉय करते हैं।

‘नो कटिंग’ का प्रण- घर बनवा रहे हो? आर्किटेक्ट से कहो – पेड़ बचाकर डिजाइन बनाओ। दुबई में बिल्डिंग के बीच से पेड़ निकलते हैं। हम क्यों नहीं कर सकते?

सवाल पूछो- नेता वोट मांगने आए तो पूछना – “हमारे वार्ड में आप 5 साल में कितने पेड़ लगवाओगे?” जब वोट पेड़ से जुड़ेगा, तभी नीतियां हरियाली से जुड़ेंगी।

आखिरी बात: कामना से आगे-

आज हम कामना करते हैं कि प्रकृति का ये श्रृंगार अमर रहे। पर कामना के साथ कर्म भी जरूरी है।

याद रखना, धरती हमारी नहीं है। हम धरती के हैं। और ये हरे-भरे पेड़ हमारे और धरती के बीच का रिश्ता हैं। ये रिश्ता टूटा, तो हम अनाथ हो जाएंगे।

तो आओ, इस पर्यावरण दिवस पर शपथ लें:
*”न काटेंगे, न कटवाएंगे। धरती की चुनरी को और हरा बनाएंगे।”*

क्योंकि जिस दिन आखिरी पेड़ कटेगा, उस दिन इंसान समझेगा कि पैसे को खाया नहीं जा सकता, और ऑक्सीजन को खरीदा नहीं जा सकता।

*आपको और आपके परिवार को विश्व पर्यावरण दिवस की हरियाली भरी, सांसों भरी, उम्मीद भरी शुभकामनाएं।* 🌿

_पेड़ लगाओ, जीवन बचाओ। यही सबसे बड़ा धर्म है, यही सबसे सच्ची देशभक्ति है।_
राजेश वार्ष्णेय एमके

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