“स्याही से सत्ता हिला देने वाला नाम: प्रताप यादव के जन्मोत्सव पर उझानी की कलम को तूफानी सलाम”।
उझानी, 4 जून 2026।
पत्रकारिता की दुनिया में जब भी निर्भीकता और सच की बात होगी, उझानी की धरती से एक नाम गूंजेगा, प्रताप यादव। दैनिक अमर उजाला के वरिष्ठ संवाददाता श्री यादव के अवतरण दिवस पर आज पूरे शहर में बधाइयों का सैलाब उमड़ पड़ा। उनकी कलम वह चिंगारी है जो अन्याय के अंधेरे को पल भर में राख कर देती है।
पिछले तीन दशकों से श्री यादव ने खबर को सिर्फ सूचना नहीं, आंदोलन बनाया। जब-जब जनता की आवाज दबाई गई, उनकी कलम गरज उठी। चाहे भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग हो, या किसी बेबस की फरियाद, प्रताप यादव की रिपोर्ट ने फाइलों में दबी सच्चाई को सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया। अफसरों की चौखट पर लगने वाली भीड़ जानती है कि यादव जी की एक खबर ही काफी है इंसाफ दिलाने के लिए।
अपने पत्रकारिता गुरु को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए राजेश वार्ष्णेय ‘एमके’ ने कहा, “गुरुजी, आपने हमें कलम पकड़ना नहीं, कलम जीना सिखाया। आपने बताया कि पत्रकार का पहला धर्म डरना नहीं, डराना है। आपकी लेखनी ने सिखाया कि खबर वो नहीं जो बिक जाए, खबर वो है जो टिक जाए। आप पत्रकार नहीं, इस युग के कबीर हैं जो शब्दों से सिस्टम पर चोट करते हैं।”
राजेश वार्ष्णेय ने आगे कहा, “आपकी कलम में तुलसी की मर्यादा है और परशुराम का तेज भी। आपने उझानी को आवाज दी है। आज आपके जन्मदिन पर मेरी एक ही कामना है। राधा रानी की कृपा-दृष्टि आपके मस्तक पर कोहिनूर बनकर दमके। सुख और समृद्धि आपके आंगन में दासी बनकर नाचे। आपकी उम्र इतनी हो कि आने वाली पीढ़ियां कहें कि हमने प्रताप यादव का दौर देखा था। हम आपके आशीर्वाद के जन्म-जन्मांतर के भिखारी हैं।”
पत्रकार संघ, व्यापारी मंडल, अधिवक्ता संघ और तमाम सामाजिक संगठनों ने श्री यादव के उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की। वरिष्ठ पत्रकार संजीव सक्सेना बोले, “प्रताप की कलम उझानी का इतिहास लिख रही है। वो खबर नहीं, दस्तावेज होते हैं।”
आज उझानी का हर चौक, हर चौराहा एक ही बात कह रहा है: जब तक प्रताप यादव की कलम में स्याही है, तब तक सच अनाथ नहीं है।
राजेश वार्ष्णेय एमके।

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