कानून को ठेंगा, मौत को न्योता: कछला स्नान के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली की सवारी।
उझानी होकर गुजरी सवारियों से खचाखच भरी ट्रॉलियां, अफसर बेखबर।
उझानी-बदांयू 1 जून।
अर्थियां उठने के बाद भी आंखें नहीं खुलीं। पूर्णिमा पर कछला गंगा स्नान के लिए श्रद्धालु फिर मौत की सवारी पर निकल पड़े। रविवार को उझानी के मुख्य चौराहे से ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और मालवाहक लोडर श्रद्धालुओं को भरकर कछला की ओर दौड़ते दिखे। प्रतिबंध के बावजूद महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग ठूंस-ठूंसकर बैठाए गए थे।
कानून साफ कहता है: ट्रैक्टर-ट्रॉली सिर्फ माल ढुलाई के लिए है, सवारी बैठाना अपराध है। मगर उझानी, बदांयू, सहित देहात क्षेत्र से आए श्रद्धालु किराया बचाने के फेर में जान जोखिम में डाल रहे हैं। सुबह 8:30 बजे और दोपहर 2 बजे उझानी से गुजरी ट्रॉलियों पर पुलिस की नजर तक नहीं पड़ी।
एआरटीओ के जागरूकता अभियान फाइलों में दबे हैं और सड़क पर लापरवाही खुलेआम दौड़ रही है। हर पूर्णिमा पर यही मंजर, हर हादसे के बाद दो दिन का शोर, फिर वही ढर्रा।


समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाते हैं। ट्रैक्टर-ट्रॉली में सफर खतरनाक है। उल्लंघन करने वालों पर चालान की कार्रवाई की जाती है। —हरीओम, एआरटीओ
— राजेश वार्ष्णेय एमके।
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