उझानी में बिजली बहाल लेकिन संकट बरकरार: ट्रिपिंग से हलकान लोग, इनवर्टर भी दे रहे जवाब।
उझानी बदायूं, 24 मई 2026।
चार दिन के ‘ब्लैकआउट अध्याय’ के बाद भले ही उझानी में बिजली लौट आई हो, लेकिन शहरवासियों की मुसीबतें खत्म नहीं हुई हैं। ट्रांसफार्मर कंपनी के इंजीनियरों ने 5 MVA ट्रांसफार्मर की खामी दूर कर शहर को रोशन जरूर किया, मगर अब अघोषित कटौती और ट्रिपिंग ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।
4 दिन अंधेरे के बाद भी ‘उजाला’ अधूरा
23 मई की शाम 5 MVA ट्रांसफार्मर चालू होने के बाद लगा था कि उझानी अब ‘अंधेरा प्रदेश से उजाला प्रदेश’ बन जाएगा। मगर हकीकत ये है कि भीषण गर्मी में रात सेलेकर आज दोपहर में दर्जनों बार ट्रिपिंग हो रही है। लोड बढ़ते ही फीडर बैठ जा रहे हैं।
व्यापारी से लेकर किसान तक परेशान
लघु उद्योग पर मार-4 दिन शटर बंद रहने के बाद जब दुकानें खुलीं तो ट्रिपिंग ने काम ठप कर दिया। बिजली के भरोसे चलने वाली आटा चक्की, वेल्डिंग और फर्नीचर की दुकानों में काम रुक-रुक कर हो रहा है।
घरों में हाल बेहाल- दिन में 43 डिग्री तापमान में पंखे-कूलर बंद हो जाते हैं। रात में कटौती से नींद पूरी नहीं हो रही। इनवर्टर भी लगातार चार्ज न होने से जवाब दे रहे हैं।
किसान बोले – फसल खतरे में- उझानी से सटे ग्रामीणों क्षेत्र में हालात और खराब हैं। किसान केशव देव बताते हैं: “2 बीघा मक्का की फसल सूख रही है। बिजली 4 घंटे आती है तो लो-वोल्टेज से ट्यूबवेल नहीं चलता।”



लोगों की जुबानी:
वीरपाल यादव, पंखा रोड “बार-बार ट्रिपिंग करती है। रात में मात्र आधा घंटा ही बिजली मिल पाई है। लाइट गुल हो जाने पर इनवर्टर भी फेल हो जाते हैं। बच्चे गर्मी से बिलबिला रहे हैं।”
राजेश कुमार, किसान “9 बीघा में मक्का बोई है। समय पर बिजली न मिलने से सिंचाई नहीं हो पा रही। फसल सूखने के कगार पर है।
स्थानीय दुकानदार- स्टेशन रोड “4 दिन बाद बिजली आई तो लगा संकट टल गया। लेकिन अब हर 10 मिनट में लाइट जा रही है। ग्राहक लौट जा रहे हैं।”
विभाग का तर्क: लोड बढ़ा, चोरी भी जिम्मेदार
बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गर्मी बढ़ने से ट्रांसफार्मर पर लोड 40% तक बढ़ गया है। रात 8 से 12 बजे तक पीक डिमांड में फीडर ट्रिप हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली चोरी भी एक बड़ी वजह है। चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है।
4 दिन का सबक, आगे की चुनौती
उझानी ने देखा कि ‘इच्छाशक्ति हो तो तारीख पे तारीख वाला सिस्टम भी शाम तक नतीजा दे सकता है’। 4 दिन बाद ट्रांसफार्मर तो सुधर गया, लेकिन ओवरलोडिंग और जर्जर लाइन का स्थायी इलाज अभी बाकी है।
जब तक 5 फीडरों पर लोड मैनेजमेंट और लोकल फॉल्ट दुरुस्त नहीं होते, उझानी वालों को ‘जनता त्रस्त से जनता मस्त’ का सफर पूरा करने के लिए अभी और इंतजार करना होगा।
_राजेश वार्ष्णेय एमके,


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