
बेजुबान तड़पते रहे, जिम्मेदारों ने फेर ली नजर
मर्ज हुई गौशाला के बाद भी चार गौवंश भूखे-प्यासे बंद, ग्रामीणों में रोष
कुंवर गांव संवाददाता
कुंवरगांव बदांयू । सालारपुर ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत यूसुफ नगर में संचालित अस्थायी गौशाला एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। गौशाला को 21 मई को आजमगंज मढ़िया भांसी स्थित गौशाला में समाहित किए जाने के बाद भी यहां चार गौवंशों को बंद हालत में छोड़ दिया गया। आरोप है कि कई दिनों से इन बेजुबानों को न पर्याप्त चारा मिल रहा है और न पानी, जिससे उनकी हालत बिगड़ती जा रही है।
ग्रामीणों के मुताबिक पहले यहां करीब 50 गौवंश रखे गए थे, जिन्हें दूसरी गौशाला में शिफ्ट किया गया। इस दौरान कुछ पशु रास्ते में इधर-उधर भाग निकले, जबकि चार गौवंश पुरानी गौशाला में ही छूट गए। भीषण गर्मी के बीच उनकी देखभाल न होने से गांव के लोगों में आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि गौ संरक्षण के नाम पर सरकारी योजनाएं तो चलाई जा रही हैं, लेकिन धरातल पर जिम्मेदार अधिकारी गंभीर नजर नहीं आते।
लोगों का आरोप है कि अगर गौशाला को बंद कर दूसरी जगह मर्ज किया जा चुका था, तो वहां मौजूद सभी गौवंशों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना भी जिम्मेदारों की ड्यूटी थी। लेकिन लापरवाही के चलते बेजुबान जानवर कई दिनों से बदहाल स्थिति में पड़े हैं।
मामले पर पशु चिकित्साधिकारी संजीव भुइयार ने बताया कि यूसुफ नगर गौशाला में मौजूद लगभग 50 गौवंशों को आजमगंज मढ़िया भांसी गौशाला में भेज दिया गया है। हालांकि ग्रामीणों का सवाल है कि जब सभी पशुओं को शिफ्ट करने का दावा किया जा रहा है, तो फिर चार गौवंश अब तक वहां किस हाल में पड़े हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि फंसे हुए गौवंशों को तुरंत सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जाए, उनके लिए चारा-पानी की समुचित व्यवस्था की जाए और पूरे मामले में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों व जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
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