UP में पंचायत चुनाव टले: विधानसभा के बाद होगा मतदान, 26 मई से गांवों में लगेगा ‘प्रशासक राज’
लखनऊ, 23 मई 2026।
उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत चुनाव को लेकर महीनों से चल रहा सस्पेंस आखिरकार खत्म हो गया। सरकार ने साफ कर दिया है कि पंचायत चुनाव अब 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद ही कराए जाएंगे। यानी गांव की सरकार के लिए अभी करीब एक साल का इंतजार करना होगा।
57 हजार पंचायतों में खत्म हो रहा कार्यकाल
प्रदेश की कुल 57,695 ग्राम पंचायतों में मौजूदा प्रधानों का 5 साल का कार्यकाल 26 मई 2026 को पूरा हो रहा है। नियमानुसार कार्यकाल खत्म होने के तुरंत बाद नई पंचायतों का गठन होना चाहिए था, लेकिन सरकार ने चुनाव टालने का फैसला लिया है।
अब गांव चलाएंगे प्रशासक
पंचायतीराज विभाग ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रस्ताव भेजा है कि 26 मई के बाद सभी ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त कर दिए जाएं। ये प्रशासक तब तक गांवों का कामकाज देखेंगे जब तक नए चुनाव के बाद प्रधान नहीं चुन लिए जाते। आमतौर पर एडीओ पंचायत, बीडीओ या अन्य अधिकारियों को प्रशासक की जिम्मेदारी दी जाती है।
क्यों टला चुनाव?
सूत्रों के मुताबिक सरकार 2027 की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पंचायत चुनाव का रिस्क नहीं लेना चाहती। पंचायत चुनाव में गुटबाजी और स्थानीय समीकरण विधानसभा चुनाव को प्रभावित कर सकते हैं। साथ ही परिसीमन और वोटर लिस्ट अपडेट का काम भी अभी बाकी है।
क्या होगा असर?
विकास कार्य- प्रशासक के आने से गांवों में विकास कार्यों की मंजूरी की प्रक्रिया बदल जाएगी। अब हर फाइल ब्लॉक से होकर गुजरेगी।
प्रधानों की छुट्टी-26 मई के बाद मौजूदा प्रधानों के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार खत्म हो जाएंगे।
दावेदारों का इंतजार बढ़ा- प्रधान बनने का सपना देख रहे हजारों दावेदारों को अब 2027 के बाद तक इंतजार करना होगा।
पहले भी हो चुका है ऐसा
ये पहली बार नहीं है जब पंचायत चुनाव टाले गए हैं। कोविड और परिसीमन के कारण पिछली बार भी चुनाव में देरी हुई थी और लंबे समय तक प्रशासकों ने ही पंचायतें चलाई थीं।
फिलहाल यूपी के 57 हजार से ज्यादा गांवों में 26 मई से ‘प्रशासक राज’ शुरू हो जाएगा। गांव की सरकार अब सीधे अफसरों के हाथ में होगी।


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