उझानी- हाईकोर्ट की रोक को दिखाया ठेंगा, ट्रैक्टर-ट्रॉली बनी ‘बारात स्पेशल’।
उझानी-बदांयू 14 मई।
उझानी वाले भइया, यहाँ कानून ट्रैक्टर के मडगार्ड से भी ज्यादा कीचड़ में सना है। हाईकोर्ट ने 2 साल पहले ही घंटा बजा दिया था – “ट्रैक्टर-ट्रॉली खेत के लिए है, बारात के लिए नहीं”। पर उझानी-बदायूं रोड पर आज भी ट्रैक्टर ही असली मेट्रो है।
उझानी के पास एक गांव से 4 ट्रैक्टर ‘गंगा नहाओ अभियान’ पर निकले। ट्रॉली में कलश, लाउडस्पीकर और श्रद्धालु लदे थे। बदायूं-कछला रोड पर कुछ दिन पहले एक ट्रैक्टर का टायर ‘धड़ाम’ से फटा और ट्रॉली में बैठे 5 लोग घायल हो गए। अस्पताल में मरहम-पट्टी करानी पड़ी ।
कोतवाली पुलिस बोली-“अबकी सख्ती होगी”।
ट्रैफिक पुलिस वाले कहते हैं कि “जागरूकता रैली निकालेंगे”
पर असलियत ये है कि सुबह 5 बजे से उझानी चौराहे पर ट्रैक्टर में लद-फंद के भक्त और बाराती सब एक साथ निकलते हैं। न हेलमेट, न बीमा, न डर।
जबकि हाइकोर्ट का सख्त आदेश है कि ट्रैक्टर = 1 ड्राइवर, 0 सवारी। पलटा तो बीमा कंपनी बोलेगी – _“भैया राम-राम, क्लेम नहीं मिलेगा”।
उझानी में हर दूसरा ट्रैक्टर ‘चलती-फिरती धर्मशाला’ बना है। नियमों की फाइल में दीमक लग गई, सड़क पर जान जोखिम में।

उझानी वालों, अगली बार गंगा नहाने जाओ तो सुरक्षा पहले देख लेना। और अफसरों से बस इतना पूछना है – “अभियान वाला पोस्टर छप गया या अभी टेंडर ही पास हो रहा है ?”
—राजेश वार्ष्णेय एमके।

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