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गैस ने कराया स्वाद से समझौता, अब डीजल भट्ठियों के भरोसे मिठाई बाजार

गैस ने कराया स्वाद से समझौता, अब डीजल भट्ठियों के भरोसे मिठाई बाजार।

बदांयू 20 मार्च।

व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की आपूर्ति न होने से खान-पान उद्योग पर बड़ा असर पड़ा है। इससे छोटे पटरी दुकानदारों से लेकर बड़े रेस्टोरेंट संचालक तक पस्त हो चुके हैं। कई जगह फास्टफूड और चाट के काउंटरों पर ताले लटक गए हैं। गैस संकट से निपटने के लिए बड़े मिठाई कारोबारियों ने अब डीजल भट्ठियों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। इसके लिए 50 हजार से लेकर 2.5 लाख रुपये तक की भट्ठियां कानपुर से मंगाई जा रही हैं। जिन व्यापारियों के पास पुरानी भट्ठियां हैं, वे उन्हें दुरुस्त कराने के लिए दौड़ लगा रहे हैं।

हालांकि, इन भारी-भरकम भट्ठियों को एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट करना और जमीन में सेट करना बड़ी चुनौती बना हुआ है।

मिठाई कारोबारी अविनाश कुमार ने बताया कि व्यावसायिक सिलिंडर की बुकिंग ही नहीं हो रही है। इससे 40 से 50 फीसदी व्यापार ठप है। चाट, डोसा और स्नैक्स के काउंटर बंद पड़े हैं। डीजल भट्ठियों से केवल खोवा और बर्फी बनाने जैसे बड़े काम ही हो रहे हैं।

स्टेशन रोड पर फास्टफूड रेस्टोरेंट संचालक रामू सिंह का कहना है कि गैस के अभाव में चाऊमीन, टिक्की और डोसा जैसे आइटम बंद करने पड़े हैं। अब केवल ओवन के सहारे पिज्जा, बर्गर और सैंडविच ही बेचे जा रहे हैं। इलेक्ट्रिक फायर भी बहुत सफल नहीं है, जिससे कारोबार सिमट कर महज 20 फीसदी रह गया है।

एक इंटर कॉलेज के पास पूड़ी, सब्जी, कढ़ी चावल बेचने वाले कारीगर ने बताया कि दो दिन से दुकान बंद है। फिलहाल इंडक्शन पर केवल चाय बन रही है। बाजार में भट्ठियों के दाम आसमान छू रहे हैं, इसलिए मजबूरी में ईंटों की भट्ठी तैयार की जा रही है। भट्ठी सूखने के बाद ही दोबारा काम शुरू हो पाएगा।

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