5:13 pm Sunday , 19 July 2026
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उझानी सीएचसी बना रैफर सेंटर चिकित्सकों का टोटा, प्रशिक्षुओं के हवाले ओपीडी

अधीक्षक सहित एक महिला चिकित्सक केसे संभालें हजारों मरीजों का बोझ।

इमरजेंसी भी ज़्यादातर प्रशिक्षु चिकित्सक की देखरेख में, मेडिकल रिपोर्ट बनाने में भी दिक्कत।

उझानी बदांयू 23 फरवरी।

कभी जिले में शामिल उझानी सीएचसी उम्दा चिकित्सकों के रहते सुपर सरकारी अस्पताल रहता था। प्राइवेट अस्पतालों से ज्यादा मरीजों की भीड़ से भरा रहने वाला नगर का सरकारी अस्पताल अब अपनी बदहाली पर आंसू बहाता नज़र आता है। सीएचसी सिर्फ रैफर सेंटर बनकर रह गई है वजह चिकित्सकों का टोटा ओपीडी भी राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्रशिक्षुओं के हवाले रहती है। अधीक्षक के अलावा सिर्फ संविदा की एक महिला डॉक्टर ही हजारों मरीजों का बोझ ढो रहे हैं।

आज से एक दशक पहले सरकारी अस्पताल में डाॅ हबीव अहमद, डॉ संजीव गुप्ता, डॉ आरके अरोरा, डॉ सुमन नागर , डॉ अमित वार्ष्णेय, डॉ पीके जैन, सहित कुछ अन्य चिकित्सकों की तैनाती के वक्त जटिल आपरेशन सहित मरीजों की उचित देखभाल के चलते भीड़भाड़ रहती थी। उनके बाद भी कुछ समय कुशल चिकित्सकों की तैनाती के चलते सीएचसी में रोनक रही।

अब सीएचसी सिर्फ अधीक्षक डॉ सर्वेश कुमार व संविदा महिला चिकित्सक डॉ हिना सफदर के हाथों में है। डॉ अनिल गुप्ता को बिल्सी, डॉ हरीश कुमार को बदायूं, वही डॉ आकांक्षा निधि पीजी करने बाहर गई। अब राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्रशिक्षुओं के हवाले अस्पताल की ओपीडी की जिम्मेदारी सोंप दी गई है। क्योंकि अधीक्षक के जिम्मे चलने वाली सरकारी योजनाओं सहित मीटिंग व व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी रहती है।
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अब कछला पीएचसी के इंचार्ज डॉ महेश प्रताप सिंह,या शेखूपुर के चिकित्सकों के हवाले इमरजेंसी रहती है, कभी-कभी अधीक्षक डॉ सर्वेश कुमार को अकेले ही तीन-तीन दिन इमरजेंसी देखनी पड़ती है वजह प्रशिक्षु चिकित्सक देखकर दवा लिख सकते हैं मेडिकल करने को एमबीबीएस होना जरूरी है ‌। चिकित्सकों की कमी का नतीजा है कि एक्सीडेंट से घायल मरीजों को सिर्फ रैफर किया जाता है। लोगों ने ज़िले के जनप्रतिनिधियों संग सीएमओ से मांग की है कि उझानी में जल्द डॉक्टर तैनात किए जाऐ जिससे अस्पताल आए मरीजों को उचित इलाज मिल सके।

राजेश वार्ष्णेय एमके।

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