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उझानी बदांयू 23 फरवरी।
माह-ए-रमजान में रोजेदार बंदों को सवाब कमाने का भरपूर मौका मिल रहा है। एक नेकी का 70 गुना सवाब मिल रहा है। ऐसे में रोजेदार एक साथ तीन फर्ज अदाकर सवाब से मालामाल हो रहे हैं। नमाज पढ़ने के साथ रोजा भी रख रहे हैं। वहीं, जो मालिके निसाब हैं वह जकात भी अदा कर रहे हैं।
रोजेदारों ने रमज़ान का चोथा दिन रविवार अल्लाह की रजा में गुजारा। भूख प्यास के बीच रोजेदारों ने अल्लाह का शुक्र अदा किया। रोजा रखने के साथ रात में तरावीह की नमाज अदा कर अल्लाह को राजी करने में लगे हुए हैं।
कुरआन-ए-पाक की तिलावत जारी है। मस्जिदों की सफें नौजवानों, बुजुर्गों व बच्चों से भरी नजर आ रही हैं। घरों में महिलाएं इबादत के साथ किचन की जिम्मेदारियां उठा रही हैं। बाजारों में चहल-पहल है। हर तरफ रमजान का फैजान जारी है।
शिक्षिक मोहम्मद शरीफ ने बताया कि रोजे से गफलत दूर होती है। इसलिए बंदा अल्लाह का करीबी हो जाता है। हदीस शरीफ में है कि रमजान और कुरआन रोजेदार की शफाअत करेंगे। अल्लाह तआला ने फरमाया कि बंदा रोजा मेरे लिए रखता है और उसकी जजा मैं दूंगा। बंदा अपनी ख्वाहिश और खाने को मेरी वजह से छोड़ता है। रोजेदार के लिए दो खुशियां हैं एक इफ्तार के वक्त और एक अल्लाह से मिलने के वक्त। रोजा रखने से बंदा अल्लाह का करीबी बन जाता है। सहरी करना पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुन्नत है लिहाजा सहरी जरूर करें। बाजारों में शाम के वक्त रोनक नजर आती है, बिल्सी रोड पर सजी रोजेदारों के लिऐ दुकानों पर ख़ूब भीड़ नजर आती है।
राजेश वार्ष्णेय एमके।

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