माघ पूर्णिमा -महायोग पुष्य नक्षत्र में श्रृद्धालुओं ने लगाई पुण्य और आस्था की डुबकी।
बारिश भी ना रोक सकी स्नानार्थियों के कदम।
उझानी-बदांयू 1 फरवरी।
माघी पूर्णिमा पर सात साल बाद एक साथ सात योग और पुष्य नक्षत्र में श्रद्धालुओं ने कछला गंगा में डुबकी लगाई। प्रीति योग, आयुष्मान, रवि, पुष्य, सर्वार्थ सिद्धि, श्रीवत्स योग समेत सात उत्तम योग बने। ऐसी मान्यता है कि इस माह में स्नान-दान, भगवान श्रीहरि विष्णु के पूजन अर्चन और कथा श्रवण करने से श्रद्धालुओं को करोड़ों गुना पुण्यफल मिलता है।
पूर्णिमा का स्नान आज एक फरवरी को सुबह से श्रद्धालुओं का कछला गंगा घाट पंहुचना शुरू हो गया। हल्की बारिश भी श्रृद्धालुओं के कदमों को रोक ना सकी। कछला गंगा घाट पर स्नान के लिए जिले के अलावा अन्य प्रांतों से श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला भोर से ही शुरू हो गया।
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पुराणों और बाल्मीकि रामायण में माघ पूर्णिमा का वर्णन हैं। इस मास में व्रत, स्नान-दान, नारायण के पूजन और कल्पवास का विधान है। सत्युग से कलयुग तक सभी युगों में माघ मास की पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस मास में श्रीहरि जल में निवास करते हैं। माघ पूर्णिमा के दिन देवलोक से देवता भी पृथ्वी पर आकर पवित्र नदियों और संगम में स्नान करते हैं। इस दिन चन्द्रमा पूर्ण अवस्था में होता है।
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मान्यता है कि सूर्योदय के समय स्नान करने से रोग और पाप दोनों से मुक्ति मिलती है। जो पूरे माघ महीने में स्नान नहीं कर पाते हैं, वह पूर्णिमा तिथि को स्वच्छ जल, सरोवर या गंगा स्नान कर सूर्यदेव को जल अर्पित कर लेते हैं तो उन्हें माघ स्नान का फल मिल जाता है। पूर्णिमा तिथि चन्द्रमा को अतिप्रिय है। पूर्णिमा तिथि के दिन चन्द्रमा की पूजा करने पर सुख-सौभाग्य और अभीष्ट योग रहता है। भगवान श्री सत्यनारायण भगवान की पूजा-अर्चना, व्रत एवं कथा का विधान है। इस बार माघ पूर्णिमा खास है, क्योंकि दिन रविवार पड़ रहा है। रविवार सूर्यदेव का दिन है।
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आज कछला गंगा में आस्था के साथ श्रृद्धालुओं ने हर-हर गंगे के उद्घोष के साथ डुबकी लगाकर गंगा मईया की पूजा अर्चना कर जरूरतमंदों को गुड़, तिल, घी कम्बल आदि दान किया।
कुछ लोगों ने घाट पर ही सत्यनारायण भगवान की कथा कराकर कन्या भोज भी किया। गंगा घाट पर कई लोगों ने भंडारे भी आयोजित किए।
राजेश वार्ष्णेय एमके


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