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पूस की रात- एक हाथ में टॉर्च, दूसरे में लाठी ठंड में फसल बचाएं या जान, मजबूर हैं किसान

पूस की रात- एक हाथ में टॉर्च, दूसरे में लाठी ठंड में फसल बचाएं या जान, मजबूर हैं किसान

उझानी- बदांयू 28 दिसंबर।

हड्डियां कंपाकंपा देने वाली पूस की रात, सर्दी में एक हाथ में टार्च और दूसरे में लाठी लेकर निराश्रित पशुओं के झुंड से फसल बचाने के लिए रातभर किसान जागकर पहरा और हाका देते हैं। सर्दी में ठंड लगने और पशुओं के हमला करने का भी अंदेशा बना रहता है। किसानों का कहना है कि फसल बचाए या जान, यह चिंता रहती है, लेकिन क्या करें मजबूरी हैं।

उझानी क्षेत्र के अब्दुल्ला गंज, बरामालदेव, लहुआ ,कठौली,नरऊ, मिहीलाल नगला, सिरसौली,गंगौरा, फरीदपुर,चुडिया आदि गांव में इन दिनों निराश्रित पशुओं के झुंड से किसान परेशान हैं। किसानों ने खेतों के चारों ओर लोहे के तारों से तारबंदी की हुई है, कुछ ने तो अपने खेत की मेड़ों पर लोहे की टिनशेड भी लगा दी है, लेकिन पशुओं का झुंड इन्हें तोड़कर खेत में घुस जाता है और फसल नष्ट कर देता हैं। इसलिए जागकर पहरा देना पड़ा रहा है। परिवार के पुरुष सदस्य बारी-बारी से जागकर पहरा देते हैं।

जानवरों का पूरा झुंड है, एक तरफ से भगाया जाए तो दूसरी तरफ चला जाता है। यह सिलसिला 24 घंटे चलता है। फसल बचाना बड़ी चुनौती है।-देवेन्द्र सिंह, गांव नरऊ।

अलाव जलाकर रात में फसलों की रखवाली करनी पड़ रही है। कई बार जानवरों से सामना हो जाता है। खेती ही गुजारे का सहारा है, क्या उसे बचाना मजबूरी है।-सर्वेश कुमार, मिहीलाल नगला।

खेती करना आसान नहीं है। प्रकृति की मार से बच भी जाए तो फसल पशुओं की भेंट चढ़ जाती है। परिवार के सभी सदस्य रखवाली में जुटे हुए हैं।- महेन्द्र कश्यप, अब्दुल्ला गंज।

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सुबह करीब 5 बजे गांव नरऊ में खेत की रखवाली कर रहे तुलसी राम ने बताया कि घने कोहरे के कारण टाॅर्च की रोशनी भी दम तोड़ रही है। इतनी कड़ाके की ठंड में पूरी रात जागकर फसलों की रक्षा करनी पड़ेगी। पशुओं का झुंड हमलावर हो जाए तो भागकर जान बचानी पड़ती है।

राजेश वार्ष्णेय एमके

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