अगेती झुलसा… पछेती झुलसा, ठंड में आलू की फसल पर मंडरा रहा बड़ा खतरा
बिल्सी- बदांयू 28 दिसंबर।
उत्तर प्रदेश में इन दिनों ठंड का प्रकोप देखने को मिल रहा है। इससे नुकसान लोगों को ही नहीं, बल्कि फसलों को भी हो रहा है। बदांयू जिले में तापमान 7 से 9 डिग्री तक पहुंच गया है, जिससे सबसे अधिक नुकसान आलू की फसल को हो रहा है।
कृषि वैज्ञानिक के मुताबिक, आलू की फसल पाले के प्रति बेहद संवेदनशील होती है और तापमान में अचानक गिरावट से फसल बर्बाद होने की आशंका बढ़ जाती है।
क्या होता फसल को पाला मारना ?
कृषि वैज्ञानिकों ने बताया, जब दिन में तापमान सामान्य रहता है और रात में अचानक 7-8 डिग्री तक गिर जाता है, तब वातावरण में मौजूद ओस की बूंदें जमकर बर्फ का रूप ले लेती हैं।
यही बर्फ जब आलू की पत्तियों पर गिरती है, तो पत्तियां फट जाती हैं और बिछात झुलसा रोग की संभावना बढ़ जाती है। इससे पौधों का विकास रुक जाता है और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
क्या है अगेती झुलसा, पिछेती झुलसा क्या है ?
खेती एक्सपर्ट ने बताया, आलू की फसल कम समय में अच्छा मुनाफा देती है, लेकिन झुलसा रोग इसकी सबसे बड़ी चुनौती है। आलू में अगेती झुलसा और पिछेती झुलसा दोनों ही रोग फंगस जनित होते हैं। अगेती झुलसा सर्दी में तेजी से फैलता है, जिसमें पत्तियों पर गोल धब्बे बनते हैं और वे झुलसकर नष्ट हो जाती हैं। यह रोग जनवरी के दूसरे और तीसरे सप्ताह में अधिक देखने को मिलता है। वहीं, पिछेती झुलसा 10 से 19 डिग्री तापमान में पनपता है और बारिश होने पर पूरी फसल तबाह कर सकता है। सर्दियों में आलू की फसल पर लाही कीट का प्रकोप भी देखा जा रहा है। यह गुलाबी या हरे रंग का कीट पत्तियों का रस चूस लेता है, जिससे पौधे कमजोर और उत्पादन क्षमता घट जाती है।
ऐसे करें बचाव
कृषि वैज्ञानिक ने किसानों को पाले से बचाव के लिए कुछ अहम उपाय बताए हैं। सुबह के समय फसल को भरपूर धूप मिलनी चाहिए, इसके लिए खेत से खरपतवार हटाएं। सल्फर का 2–3 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें, जिससे ठंड और फफूंद दोनों से बचाव होता है। खेत की मेड़ पर अरहर, मक्का या सरसों जैसी ऊंची फसलें लगाकर ठंडी हवा को रोका जा सकता है। साथ ही मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखते हुए तापमान गिरने की स्थिति में रात में हल्की सिंचाई या धुएं का प्रबंध करने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर सावधानी बरतने से आलू की फसल को ठंड और पाले से सुरक्षित रखा जा सकता है और किसान नुकसान से बच सकते हैं।
अमन वार्ष्णेय बिल्सी
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