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मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम संसार के लिए हैं आदर्श -रवि जी महाराज

उझानी बदांयू 15 दिसंबर।

कोतवाली क्षेत्र के गांव बरसुआ में श्रीराम कथा महोत्सव के पांचवें दिन कथा स्थल आध्यात्मिकता, भक्ति और संस्कारों की पवित्र ऊर्जा से झिलमिलाता रहा। सुबह से ही कथा पंडाल में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। महिला–पुरुष, वृद्ध–युवा और बच्चे—सभी श्रद्धा और भाव से ओतप्रोत होकर कथा श्रवण के लिए पहुंचे।

वातावरण राम-नाम के मधुर कीर्तन, घंटे-घड़ियाल और जयकारों से गूंजता रहा। शिरोमणि श्री रवि जी महाराज ने श्री राम कथा का श्रवण कराया। उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम संसार के लिए आदर्श हैं। मर्यादा, संयम, सेवा, कर्त्तव्य और सत्य ये वे मूल्य हैं जिनसे जीवन महक उठता है। उन्होंने कहा जो भी भगवान श्रीराम के गुणों को आत्मसात कर लेता है, उसका जीवन सदैव शुभ, पवित्र और प्रेरणादायी बन जाता है।

रवि जी महाराज ने भगवान श्रीराम के अवतार, राजा दशरथ–कौशल्या की तपस्या का फल, तथा लक्ष्मण–भरत–शत्रुघ्न के जन्म प्रसंग का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने कहा कि अयोध्या का प्रत्येक कण तब आनंदित हुआ था जब बाल-राम ने प्रथम बार नेत्र खोले। अयोध्या नगरी धन्य हो गई। हर कोई भगवान श्री राम की एक झलक अपने को उतावला था। जिसने भी प्रभु श्री राम के दर्शन किए उसका जीवन सफल हो गया। इसके बाद उन्होंने गुरु वशिष्ठ के आश्रम में शिक्षा-दीक्षा, महर्षि विश्वामित्र द्वारा प्रभु राम–लक्ष्मण को मांगना, संघर्षों से भरी दैत्य ताड़का का अंत, सुबाहु-वध, महा पतिव्रता अहिल्या उद्धार, गंगा जी की महिमा और उद्गम तत्त्व को कथा रूपी सरोवर में भक्ति-भाव के साथ पिरोया।

कथा का वह क्षण भक्ति से परिपूर्ण हो उठा जब महाराज जी ने जनकपुरी आगमन, जनक महल की भव्यता, पुष्प–उद्यान में सीता–राम के प्रथम मिलन और शिव धनुष भंजन का वर्णन किया। जैसे ही महाराज जी ने धनुष टूटने का प्रसंग सुनाया, पंडाल भक्तिमय जयकारों से गूंज उठा। भक्तों ने खड़े होकर जय श्रीराम का उद्घोष किया। महाराज जी ने भक्तों को समझाया कि धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि जब-जब होती है, तब-तब भगवान सज्जनों की रक्षा और दुष्टों के विनाश के लिए अवतार लेते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीराम का जीवन हर युग के लिए प्रेरणास्त्रोत है।

आज के समय में भी यदि हम उनके आचरण को अपनाएं तो समाज में प्रेम, सद्भाव और सत्य की स्थापना संभव है। कथा के दौरान ग्राम बरसुआ के आसपास के दर्जनों गांवों से बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। देवकन्याओं और महिलाओं ने भक्ति में लीन होकर कथा श्रवण की। युवा वर्ग ने भी रुचि और श्रद्धा से कथा को सुना। श्रद्धालुओं की संख्या प्रतिदिन बढ़ती जा रही है और कथा महोत्सव ग्रामवासियों के लिए एकता, भक्ति और समरसता का पर्व बन गया है।
इस मौके पर आयोजकों में अंजू चौहान लल्लू सिंह चौहान, राकेश सिंह, दिग्वेद्र सिंह, आदित्य महाजन, बब्लू सिंह आदि तमाम भक्तगण मौजूद रहे।

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