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विश्व मृदा दिवस पर बिषेश।
बदांयू 5 दिसंबर।
इस समय खेतो से सोना उगलने वाली माटी के बंजर होने का खतरा मंडरा रहा है। भरपूर पैदावार देने वाली मिट्टी खुद अपनी सेहत खोती जा रही है। मिट्टी में पाए जाने वाले मुख्य पोषक तत्व नाइट्रोजन, जीवांश कार्बन न्यूनतम स्तर पर आ गए हैं। सूक्ष्म पोषक तत्व आयरन और जिंक भी मानक से कम हैं।
जिले में लगभग दो लाख हैक्टेयर भूमि का उपयोग खेती के कार्य में किया जाता है। मिट्टी की सेहत जानने के लिए कृषि विभाग के माध्यम से आवश्यक पोषक तत्वों की समय- समय पर जांच कराई जाती है लेकिन इस बार आए नतीजे पहले से कहीं अधिक चौंकाने वाले हैं।
जिले की सभी विधानसभाओं के क्षेत्रों में मिट्टी में पाए जाने वाले मुख्य पोषक तत्व नाइट्रोजन व जीवांश कार्बन न्यूनतम स्तर पर पहुंच गए हैं। फाॅस्फोरस व पोटाश भी पर्याप्त मात्रा में नहीं है। इनका स्तर मध्यम पाया गया है। सूक्ष्म तत्वों में आयरन व जिंक की स्थिति बेहद खराब है। ये तत्व मानक से कम मात्रा में पाए जा रहे हैं। परिणामों ने कृषि विभाग के साथ किसानों को भी चिंता में डाल दिया है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि वर्षों से किसान फसल चक्र का पालन नहीं कर रहे हैं। एक ही फसल को लगातार बोने, अंधाधुंध रासायनिक खाद का उपयोग और जैविक खाद की अनदेखी ने मिट्टी को कमजोर बना दिया है।
हर साल मिट्टी का पोषण घट रहा है। इससे खेतों की उपज कम होती जा रही है। यदि अभी भी ठोस कदम नहीं उठाए गए तो धरती की उर्वरा क्षमता को बचाना मुश्किल हो जाएगा। मिट्टी स्वस्थ रहेगी तो ही खेत सोना उगलेंगे वरना बंजर जमीन और बढ़ती लागत किसानों की सबसे बड़ी चुनौती बन जाएगी।
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