8:48 pm Monday , 20 July 2026
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उसावां – मंदाकिनी साहित्य मंच के तत्वावधान में विराट कवि सम्मेलन का आयोजन

विराट कवि सम्मेलन का हुआ भव्य आयोजन।

उसावां/उसहैत-
बीती रात उसावां में प्रियंका अनिल सिंह चौहान के आवास पर मंदाकिनी साहित्य मंच के तत्वावधान में विराट कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ अनिल सिंह चौहान एवं मुख्य अतिथि शेर सिंह शेर जी ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम का संचालन ओज के वरिष्ठ कवि कमलकांत तिवारी ने किया। मां वाणी की वंदना पढ़कर महेश अग्निमुख ने कार्यक्रम को गति प्रदान की। बदायूं से पधारे श्रेष्ठ गीतकार डॉक्टर अरविंद धवल ने पड़ा,
राम नहीं दिखते भैया में सीता दिखे ना भाभी में,
ताला तोड़ रहे हैं हम विश्वास नहीं है चाबी में,
पश्चिम की आंधी में उड़कर आज यहां आ पहुंचे हैं,
हम कस्तूरी ढूंढ रहे हैं अब कुत्तों की नाभी में।
उसहैत के श्रेष्ठ छंदकार नन्दकिशोर पाठक ने पढ़ा,
इस देश में ही पुनर्जन्म मांगते रसखान,
इकबाल का सारे जहां से प्यारा हिंदुस्तान,
अब्दुल हमीद जैसे वीर जान दे गए,
अशफाक उल्ला खान के सपने नए-नए।
महेश चंद्र मिश्रा अग्निमुख ने पढ़ा, है बहुत ही अंधेरा मेरे देश में,
कर सकूं मैं उजाले से सारा वतन।
जगपाल जग ने पढ़ा,
मैंने मुश्किलें हालत में खुद को संवारा है,
मैं कैसे भुलाऊं आपने किस्तों में मारा है।
मशहूर शायर अब्दुल वहाब आजाद ने पढ़ा,
चुनौती आंधियों को दे रहा है,
मेरे आंगन में जो बूढ़ा शजर है।
बदायूं से पधारे अचिन मासूम ने कहा,
चढ़ता सूरज हूं एक दिन उतर जाऊंगा,
तुम जो छू लोगे तो मैं निखर जाऊंगा।
विवेक अज्ञानी ने पढ़ा,
पाठ जब आचरण का पढ़ते हैं हम,
शख्सियत अपनी असली छुपाते हैं हम।
ओज के सशक्त हस्ताक्षर कमलकांत तिवारी ने पड़ा,
कह दो भारत की संसद से और सियासत दारों से,
जंग नहीं जीती जाती है जंग लगे हथियारों से।
अमित वर्मा अंबर ने पढ़ा,
भाव से भावना का वरण हो गया
हृदय के सब दुखों का छरण हो गया
मन में जब-जब जगी स्वर्ण मृग की ललक
जग में तब तब ही सीता हरण हो गया।
आदेश कुमार सिंह ने पड़ा,
आज देश में फिर बलिदानों वाली बेला आई है,
भूषण जैन की बड़ाई में फिर से टेर लगाई है।
संतोष कुमार सिंह ने पड़ा,
जिस वसुधा पर मानव बनकर आते रहते हैं महाकाल,
जिस वसा पर पैदा होते संग जैसे योद्धा कराल।
रामानंद मिश्रा ने पढ़ा,
साहित्य मंच मंदाकिनी ले आया पंखुड़ियां,
मैं उसमें से चुन लाया अंजुलि भर पंखुड़ियां।
कवित्री रश्मि रति यादव ने कहा,
न किसी हुकम रान दौलत को सलाम करती हूं,
न तख्तो ताज न शोहरत को सलाम करती हूं।
मुशीर अहमद मुशीर ने पढ़ा
दिल में है एक आवाज और है एक ही नारा,
हम हैं तिरंगे के तिरंगा है हमारा।
इसके अलावा मंदाकिनी साहित्य मंच के संस्थापक कवि शेर सिंह शेर,कवियत्री मनी सिंह गौर तथा सुरेश कुमार यादव ने भी काव्य पाठ किया।
कार्यक्रम देर रात तक चलता रहा जिसमें श्रोताओं ने भरपूर तालियों से कवियों का उत्साह वर्धन किया।
अंत में नगर पंचायत उसावां केनगर पंचायत अध्यक्ष प्रियंका अनिल सिंह चौहान ने सभी कवियों एवं पत्रकारों को मोमेंटो व पटका, माला पहनाकर सम्मानित किया।

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