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उझानी बदांयू 11 नवंबर।
वाकई में बदांयू के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी पूरी ईमानदारी से काम करते हैं, मुख्यमंत्री के पोर्टल पर पहुंची शिकायत पर बदायूं से उझानी सिर्फ आशीर्वाद हाॅस्पीटल पर ही आऐ, जबकि नगर में आते वक्त रास्ते में पडे अवैध अस्पताल को नजरअंदाज कर दिया।
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एसीएमओ डॉ मोहन झा के नेतृत्व में टीम आई आते ही संचालक जितेन्द्र यादव से रजिस्ट्रेशन के कागजात मांगे जब रजिस्ट्रेशन है ही नहीं तो दिखाऐ क्या ?, सवाल उठना लाजिमी है क्या स्वास्थ्य विभाग को जानकारी नहीं उनके यहां से नगर में कितने नर्सिंग होम, अस्पताल रजिस्टर्ड है।
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आशीर्वाद हाॅस्पीटल के आस-पास ही तीन चार बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित होते हैं अस्पताल, मगर एसीएमओ साहब की नजरें उस तरफ नहीं गई। क्योंकि जब शिकायत होगी तभी स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच करेगी। वर्ना धड़ल्ले से अवैध नर्सिंग होम, अस्पताल में मरीजों की जान से खिलवाड़ करते रहो।
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आधा दर्जन से अधिक अवैध नर्सिंग होम स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के चलते नगर में संचालित होते हैं, जब कोई घटना होती है तो विभाग नींद से जागता है, आठ दस दिन बाद वही नर्सिंग होम फिर संचालित हो जाते हैं स्वास्थ्य विभाग चद्दर तान सो जाता है।
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जब अवैध है तो दो दिन का वक्त क्यों ?।
आशीर्वाद हाॅस्पीटल को एसीएमओ डॉ मोहन झा ने अवैध माना, रजिस्ट्रेशन ना दिखाने पर सिर्फ आपरेशन थियेटर को सील किया गया, पूरे हाॅस्पीटल को सील कर रिपोर्ट दर्ज क्यों नहीं कराई, अगर ऐसा होता तो अन्य अवैध अस्पतालों को भी स्वास्थ्य विभाग का खोफ रहता।
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