
अलापुर । नगर सहित आसपास के इलाकों में गमगीन माहौल मे मनाया गया मुहर्रम का त्यौहार इमामबाडो से उठाये गये ताजिये और मेहंदी चारो तरफ गूँजी या हुसैन की सदा।
नगर में गमगीन माहौल मे ताजियो को उठाया गया और लोगों ने ताजिये इमामबाडे से उठकर जामा मस्जिद चौराहे होते हुए महल मोहल्ला मे कुछ देर रूक कर मातम किया महल से उठाकर अंसारी मोहल्ला व लुहार वाला होते हुए दोबारा इमामबाडे मे रख दिया गया। सखानू , इक़री भासरला,स्थानों व इमामबाड़ों में मजलिसों का आयोजन किया गया वही दूसरी ओर मौजेशाह व मौलाशाह के इमामबाडे मे रात भर शबेदारी कीऔर फ़िज़ा मे हुसैन हुसैन की सदाये गूँजने लगी, इमाम हुसैन ने कर्बला में इंसानियत का जो सन्देश दिया वह इंसान के लिए आज भी फायदेमंद है। जैसे चाहने वाले हुसैन को मिले वैसे किसी को नहीं मिले। इसीलिए कर्बला में हुसैन ने चिराग बुझाकर कहा जो जाना चाहे चला जाये मगर एक भी चाहने वाला नही गया और हुसैन के लिए अपनी कुर्बानी पेश की। शनिवार की सुबह 8 बजे से रात 3 बजे तक मजलिसो का सिलसिला चलता रहा.मजलिस में हर धर्म के लोगो ने शिरकत की और गमे हुसैन मनाया और एक इंसिनत की मिसाल कायम की सुन्नी समाज द्वारा शहीदाने कर्बला इमाम हुसैन की सदाये गूंजने लगी इस मौके पर क़ाज़ी मोहम्मद अज़हर, मोहम्मद लड्डन, सलीम , गुड्डू शाह, डॉ मोहत्तर, कार्रर शेख,सद्दाम हुसैन, तनवीर उद्दीन, शहवाज खतीब, मो सैफ, मोहम्मद गुफरान, भोला,
इंस्पेक्टर उदयवीर सिंह अपने दल के साथ जुलूस में शामिल रहें ।
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