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बदांयू 13 जुलाई।
बदांयू जिले में इस सीजन आलू किसानों को लागत भी नहीं मिल पा रही, जबकि उपभोक्ता को आलू ढाई गुने दाम पर खरीदना पड़ रहा है। थोक मंडी में 700-800 रुपये प्रति क्विंटल बिकने वाला आलू फुटकर में 18-20 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। थोक और फुटकर के बीच भारी अंतर से बिचौलियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
जिले के कोल्डस्टोरेज से अबतक भंडारण का 10 फीसदी आलू ही निकला है। जबकि सामान्य तौर पर जुलाई तक 13 से 15 फीसदी निकासी हो जाती थी। पिछले साल भी इसी समय तक 12-13 फीसदी निकासी हो चुकी थी।
कोल्ड स्टोरों में अभी भी करीब 90 फीसदी आलू पड़ा है। बाजार में कम दाम मिलने के कारण किसान आलू निकालने से बच रहे हैं।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार किसान अपना आलू सीधे उपभोक्ता तक नहीं बेच पाते। अधिकांश किसान कोल्ड स्टोर परिसर या मंडी में ही व्यापारियों को माल बेच देते हैं। इसके बाद यही आलू कई हाथों से गुजरकर फुटकर बाजार तक पहुंचता है।
परिवहन और अन्य खर्च जोड़ने के बाद भी व्यापारियों का अनुमानित मार्जिन दोगुना तक पहुंच रहा है। नतीजा – किसान को 7-8 रुपये किलो और ग्राहक को 20 रुपये किलो।
किसानों की मुश्किलें लागत बढ़ने से और बढ़ गई हैं। पिछले साल कोल्ड स्टोर का किराया 270 रुपये प्रति क्विंटल था, जो इस साल 280 रुपये हो गया है। मजदूरी, परिवहन और अन्य खर्चों में भी बढ़ोतरी हुई है।
किसान अनमोल ने कहा, “इस बार आलू ने किसानों को परेशान कर दिया है। कम दाम के कारण शुरुआत में ही उपज बेचनी पड़ी।”
किसान सुरेश यादव ने बताया, “शुरू से ही कीमतों के लिए जूझना पड़ रहा है। अब बढ़ोतरी की उम्मीद भी टूट रही है।”
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसानों को बेहतर मूल्य और पारदर्शी विपणन व्यवस्था नहीं मिली तो इसका असर अगले सीजन में आलू के रकबे पर पड़ेगा। उन्होंने कहा, “कम निकासी इस बात का प्रमाण है कि आने वाले दिनों में कीमतें किसानों को और परेशान कर सकती हैं।
किसान संगठनों ने कोल्ड स्टोर के भाड़े में 200 रुपये प्रति क्विंटल अनुदान देने की मांग की है।
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