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सोना 15 हजार रुपये सस्ता, फिर भी नहीं लौटी सर्राफा बाजार की रौनक

पलटे के कारोबार से थमा सर्राफा, नई ज्वेलरी की मांग में भारी गिरावट।

उझानी-बदांयू 15 जुलाई।

पिछले तीन महीनों में सोने-चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट के बावजूद सर्राफा बाजार में नई ज्वेलरी की खरीदारी ठंडी पड़ी है। भाव गिरने से ग्राहकों में “और गिरेगा” का डर है। नतीजा – लोग नया सोना-चांदी खरीदने के बजाय घर में रखे पुराने आभूषणों को गलाकर नए डिजाइन बनवाने यानी “पलटे” के कारोबार पर जोर दे रहे हैं।

सर्राफा बाजार के आंकड़ों के अनुसार सोना अपने पीक ₹1.65 लाख प्रति 10 ग्राम से गिरकर अब ₹1.40 लाख पर आ गया है। यानी ₹15,000 की गिरावट। वहीं चांदी भी ₹3 लाख प्रति किलो से लुढ़ककर ₹2.30 लाख पर पहुंच गई है। औद्योगिक और आभूषण मांग घटने से चांदी में भी ₹70 से 80 हजार प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई।

व्यापारियों के मुताबिक आयात शुल्क बढ़ने से सोने-चांदी का आयात करीब 50 प्रतिशत तक घट गया है। कीमतों में अनिश्चितता के कारण निवेशक भी हाथ रोककर बैठे हैं।

बाजार की भाषा में “पलटा” का मतलब पुराने जेवर देकर बदले में नए जेवर बनवाना है। महंगाई और भाव गिरने के डर के बीच मध्यम वर्ग के लिए यह सबसे सुरक्षित विकल्प बन गया है। ग्राहक अब नई धातु नहीं खरीद रहे, सिर्फ मेकिंग चार्ज और जीएसटी देकर पुराने गहनों को लेटेस्ट डिजाइन में बदलवा रहे हैं।

सर्राफा कमेटी के अध्यक्ष संजय कुमार मित्तल ने बताया, नई धातु की खरीद लगभग बंद है। ग्राहक डरा हुआ है। बाजार को सिर्फ पलटे का काम ही चला रहा है।

आभूषण निर्माताओं का कहना है कि आयात घटने से व्यापार को नुकसान है, लेकिन पलटे के कारण स्थानीय कारीगरों को लगातार काम मिल रहा है।

शोरूम संचालक सिद्धांत गोयल के अनुसार आने वाले वैवाहिक सीजन में भी लोग नई खरीदारी का जोखिम नहीं ले रहे। पुराने भारी और आउटडेटेड जेवर देकर हल्के और ट्रेंडी डिजाइन बनवाए जा रहे हैं। इससे पैसा भी बच रहा है। उन्होंने बताया कि महंगाई के दौर में पलटा बजट को संतुलित करने का सबसे अच्छा तरीका है।

कुल मिलाकर भाव गिरने के बाद भी सर्राफा बाजार की चमक नहीं लौटी। अब कारोबारियों को उम्मीद है कि शादी का सीजन पलटे के साथ-साथ नई खरीद को भी रफ्तार देगा।

राजेश वार्ष्णेय एमके।

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