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उझानी-बदांयू 14 जुलाई।
आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ कल 15 जुलाई, बुधवार से होगा। यह पर्व 23 जुलाई तक नौ दिनों तक चलेगा। इस दौरान मां आदिशक्ति के नौ स्वरूपों के साथ दस महाविद्याओं की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।
ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण शर्मा ने बताया कि गुप्त नवरात्रि मुख्यतः साधकों, संतों और तांत्रिक उपासकों का पर्व है। इसमें सार्वजनिक उत्सव की जगह ध्यान, मंत्र-जाप और एकांत साधना को प्राथमिकता दी जाती है।
उन्होंने बताया कि इन नौ दिनों में मां काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुरा भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी — इन दस महाविद्याओं की आराधना का विशेष महत्व है। साधक इस अवधि में तंत्र साधना और विशेष अनुष्ठान भी करते हैं।
आचार्य प्रवीण शर्मा के अनुसार गुप्त नवरात्रि वर्ष में दो बार आती है। पहली माघ मास और दूसरी आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष में। सीमित जानकारी और गुप्त साधना के कारण ही इसे “गुप्त नवरात्रि” कहा जाता है। इसे “गायत्री नवरात्रि” के नाम से भी जाना जाता है।
इस दौरान साधक ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे महामंत्र का जाप करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय की गई साधना शीघ्र फलदायी होती है।
उल्लेखनीय है कि 25 जुलाई से चातुर्मास भी प्रारंभ हो रहा है, जिसके कारण इस बार आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।
राजेश वार्ष्णेय एमके।
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