“सिर पर गमछा, हाथ में बोरी, आंखों में उम्मीद”
खरीफ की तैयारी में जुटे बदायूं के किसान, सर्वर की सुस्ती से परेशान।
बदांयू 16 जुलाई।
तस्वीर बदांयू जिले की एक सहकारी समिति की है। लाइन में 40-50 किसान। किसी के सिर पर सफेद गमछा, किसी ने तौलिया बांध रखा है। हाथ में आधार कार्ड, कंधे पर पुरानी प्लास्टिक की बोरी। उम्र 20 से 65 तक। मगर मकसद सबका एक – “खाद मिल जाए, फसल बच जाए”।
बदांयू में पिछले दिनों मानसून की पहली बारिश के बाद खेतों में हलचल तेज हो गई। धान की रोपाई और बाजरा-मक्का की बुवाई का समय आ गया तो किसान भी समितियों पर टूट पड़े।
लाइन में खड़े बिल्सी के किसान राजवीर सिंह ने कहा: “रात को ही बेटे से कह दिया था 5 बजे निकल जाना। धूप में खड़े-खड़े पसीने से कुर्ता भीग गया। पीओएस मशीन बार-बार हैंग हो रही थी। 2 घंटे बाद नंबर आया तो 2 मिनट में यूरिया की बोरी मिल गई।”
सहसवान की महिला किसान सुनीता देवी बोलीं: “बाजरा बोना है। डीएपी के बिना बीज अंकुरित ही नहीं होगा। अगर आज नहीं मिली तो बारिश निकल जाएगी।”तस्वीर में दिख रहा हर चेहरा यही कह रहा था – देरी नहीं चलेगी।
किसानों का उत्साह था, पर डिजिटल सिस्टम ने रफ्तार धीमी कर दी। सुबह 9 से 11 बजे तक सर्वर डाउन रहा। आधार वेरिफिकेशन में दिक्कत आई। नतीजा – तपती धूप में घंटों इंतजार। 11 बजे के बाद सर्वर ठीक हुआ तब जाकर वितरण में तेजी आई।
जिला कृषि अधिकारी ने कहा: “घबराने की जरूरत नहीं है। जिले में यूरिया और डीएपी का पर्याप्त स्टॉक है। आज सुबह तकनीकी दिक्कत आई थी जिसे ठीक कर दिया गया है। हर ब्लॉक में मांग के अनुसार खाद भेजी जा रही है। निजी दुकानों पर ज्यादा दाम पर बिक्री की शिकायत मिले तो तुरंत कार्रवाई होगी।”
मौसम विभाग ने बताया कि अगले 2 दिन जिले में अच्छी बारिश हो सकती है। इसी नमी का फायदा उठाकर किसान बुवाई निपटाना चाहते हैं। इसलिए अगले 3-4 दिन समितियों पर भीड़ और बढ़ सकती है।
खेत पानी मांग रहे हैं, किसान खाद मांग रहे हैं। बस समय पर दोनों मिल जाएं तो बदायूं में खरीफ की फसल फिर से लहराएगी।
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