12:09 am Saturday , 18 July 2026
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बदायूं के राजनेताओं की छलनी के आगे किसी की नहीं चलनी ?

बदायूं के राजनेताओं की छलनी के आगे किसी की नहीं चलनी?
बदायूं की बात – सुशील धींगड़ा के साथ

जीवन में छलनी का काम किसी भी वस्तु को छानकर उपयोगी और अनुपयोगी भाग को अलग करना होता है। चाय बनाते समय छलनी चाय की पत्ती को रोक लेती है और साफ चाय लोगों तक पहुंचाती है। लेकिन बदायूं की राजनीति में मानो यह व्यवस्था उलटी दिखाई देती है।

ऐसा महसूस होता है कि विकास की चाय तो सत्ता और प्रभावशाली लोगों के पास ही रुक जाती है, जबकि आम जनता तक केवल उसके दावे, घोषणाएं और बची-खुची झलकियां ही पहुंचती हैं। विकास कार्यों की तस्वीरें और उपलब्धियों के दावे खूब दिखाई देते हैं, लेकिन जब धरातल पर उनकी वास्तविकता तलाशने की कोशिश की जाती है तो कई स्थानों पर तस्वीर कुछ अलग नजर आती है।

आम लोगों के बीच अक्सर यह चर्चा सुनने को मिलती है कि विकास योजनाओं का पूरा लाभ जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है। लोगों की अपेक्षा है कि जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार लोग व्यक्तिगत या राजनीतिक लाभ से ऊपर उठकर क्षेत्र के समग्र विकास पर ध्यान दें, ताकि सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, जल निकासी, रोजगार और अन्य बुनियादी सुविधाओं में वास्तविक सुधार दिखाई दे।

जनता का मानना है कि लोकतंत्र की असली ताकत तभी साबित होगी, जब विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। यदि योजनाओं का लाभ कुछ लोगों तक सीमित रह जाए और आम नागरिक केवल वादों और तस्वीरों तक ही सीमित रह जाए, तो विकास के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

बदायूं की जनता अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि धरातल पर दिखने वाले कार्य चाहती है। उम्मीद है कि जनप्रतिनिधि जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे और विकास की “छलनी” ऐसी होगी, जिसमें से लाभ सीधे आम नागरिक तक पहुंचे, न कि केवल चुनिंदा लोगों तक।

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