3:59 am Monday , 20 July 2026
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समाज सुधारक की आवाज और कैसे दे कोई उनका साथ ?

बदायूं की बात- सुशील धींगडा के साथ
एक समाजसेवी पिछले कुछ दिनों से जनपद में चर्चा का विषय बने हुए हैं परंतु ऐसा नहीं है कि चर्चा में आने को समाजसेवी ने कोई ऐसा काम कर दिया हो जो काबिले तारीफ लगता हो। हो सकता है यह उनके निजी विचार हों परंतु चर्चा में आने के लिए उन्होेने जो रास्ता अपनाया वह तमाम लोगों के दिल को छूने की जगह कचोट सा रहा है क्योंकि समाजसेवी द्वारा इस तरह के तमाम मामले चर्चा में आने के लिए पूर्व में किए जा चुके हैं जिसके चलते उनकी छवि और कार्यप्रणाली आम आदमी की समझ में नहीं आती। पहले विरोध करना और कुछ दिन बाद खामोश होकर बैठ जाना समाजसेवी की ऐसी आदत है जो उनकी छवि को धूमिल करने का काम करती नजर आती है। अपनी बात को जनता के बीच लाने को पहले मीडिया का सहारा लेते थे परंतु पिछले वर्षों में मीडिया द्वारा उनसे दूरी बना लेने के बाद अब वह सोशल मीडिया को अपनी लोकप्रियता का रास्ता बना रहे हैं। कभी उनको किसी के विकास से दर्द होता है तो कभी उनको अपना घर भी नहीं दिखाई देता। पता नहीं उपरोक्त समाजसेवी जनपद में क्या सोच देना चाहते हैं और कब तक केवल अपनी बात को सहीं ठहराते रहेगें और हर बार एक नया तीर और नया शिकार देखते रहेगें क्योंकि अब तक तो किसी मामले में वह चार दिन से ज्यादा टिक नहीं पायें हैं।

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