बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
आगामी वर्ष में होने वाले विधानसभा चुनाव में कुछ विधायक इस बात को लेकर दुविधा में हैं कि वह अपना टिकट कैसे बचायें जबकि कुछ दावेदार इस बात को लेकर परेशान हैं कि वह टिकट किस तरह पाये। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा और सपा दोनों के जनपद में तीन विधायक जीते थे जिनमें से सपा के एक विधायक वर्तमान समय भाजपा में दिख रहे हैं और इस द्रष्टि से जिले में भाजपा का पलडा भारी दिख रहा है लेकिन सपा आगामी विधानसभा चुनाव में बदायूं को फिर से सपाई किला बनाने की रणनीति बना रही है जबकि भाजपा को जनपद को भगवा रंग देने की राह पर जा रही है। सपा और भाजपा दोनों राजनेतिक दलों में गुटबाजी की रणनीति पूरी तरह हावी दिख रही है और यह गुटबाज प्रबंधक हम ही खेलेगें नही ंतो खेल बिगाडेगें की खुली चुनौती देते नजर आ रहे हैं इसी बात के चलते सपा और भाजपा दोनों दलों को विरोधियों से ज्यादा अपनों पर निगाह रखनी पड रही है। सपा में कुछ लोग बदायूं को सैफई मुक्त कराने की योजना पर सक्रिय हैं और इसे बदायूं से लेकर लखनउ तक सब सैफई वाले जानते और मानते हैं जबकि भाजपाई हर चुनाव में हाइकमान के नवीन उपयोग करने से बुरी तरह दुखी हैं। ऐसा लगता है कि विधानसभा चुनाव का टिकट पाना जनपद की राजनीति में सबसे टेडी खीर है क्योंकि सबको लगता है कि टिकट मिल गया तो दो महीने की मेहनत के बाद पांच साल तक सुबह शाम पनीर और उसके बाद जीवनभर पेंशन की खीर है।
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