बदायूं का इतना विकास, जिन्दाबाद और जिन्प्दाबाद
बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
पिछले दिनों बदायूं में दिन और रात विकास हुआ जिससे बदायूं वासियों को सहूलियत मिलने के दावे किए गए, लोगों को स्वर्ग से सुन्दर बदायूं दिखने का सपना दिखाया गया लेकिन बीती रात होने वाली एक घंटे की बरसात ने विकास के दावों की असलियत उस समय सामने लाकर रख दी जब आधे घंटे में बदायूं शहर स्वर्ग से सुन्दर दिखने की जगह ऐसा टापू दिखने लगा और ऐसा लगने लगा कि बदायूं शहर किसी समुद्र के किनारे बस गया है। हालत यह हो गई जरा सी बरसात ने जो जहां था वहीं रूकने को मजबूर कर दिया और बरसात थमने के बाद जब नागरिक सडकों पर निकले तो घुटने से अधिक जलभराव ने नागरिको का स्वागत किया जबकि तमाम दोपहिया वाहन सडकों पर होने वाले जलभराव के चलते खराब हो गए जिसके उपरांत नागरिकों ने पैदल चलकर दोपहिया वाहन खींचकर जाने को मजबूर कर दिया। सबसे बुरा हाल छह सडका से गांधी मैदान को जाने वाली उस नवनिर्मित सडक पर दिखा जहां भूमिगत विद्युत प्रणाली के तमाम बाक्स जलभराव चलते पानी में डूब गए जबकि गांधी मैदान और छह सडका के बीच तीन – चार स्थानों पर सडक पर गडडे बना दिये जिसमें राहगीर गिरते पडते रहे। गनीमत यह रही कि बिजली आने पर विद्युत बाक्स में करंट नहीं आया नहीं तो बदायूं में एक अजब और गजब दिल को दुखाने वाले हादसेे को देखने एवं सहने को मजबूर होना पडता।
इस विकास को नगरवासी विकास का गजब अहसास कह कर उपहास उडाते हुए कह रहे है कि बदायूं में कैसा विकास और विकास में कितना मिठहास, इस पर सभी यही कहेगें यही तो है लोकतंत्र का जिंदाबाद।
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