कितना करें इंतजार सुनों जी यह चुप्पी बेकार ?
बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
जनपद में एक प्रमुख राजनेतिक संगठन चुप्पी साधकर पूरी फिल्म चुप्पी साधकर क्यों देख रहा है, यह बात आम आदमी के साथ दरियां बिछाकर अर्श पर पहुंचाने को दिन – रात एक करने वाले समर्पित कार्यकर्ताओं को हजम नहीं हो रही है। वजीरगंज के भूमि प्रकरण में खामोशी, दातागंज में पूर्व तत्कालीन चेयरमैन और सत्ताशाली व्यक्ति के मामले की गूंज पूरे देश में गूजी परंतु संगठन के कानों में जूं तक क्यों नहीं रेगीं। नगर निकाय चुनाव में वजीरगंज और बिसौली के अलावा बदायूं, अलापुर, उसहैत में खुलेआम बगावत से मिलने वाली पराजय के बावजूद चुप्पी और सैजनी प्रकरण खामोशी, दातागंज में वजीरगंज, अलापुर, उसावां में गुटबाजी के बावजूद चुप्पी से समर्पित कार्यकर्ताओं को लगता है कि बदायूं में सीधे और सौभ्य व्यवहार वाले लोग आताताईयों के मामले में चुप्पी साधकर मौन हो जाते हैं। पता नहीं यह चुप्पी साइकिल वालों के उस रास्ते पर क्यों जा रही है जिसने बदायूं को किला समझने वालों को हिला दिया था।




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