ऐसे कैसे कसम चलेगा जिसकी अटकेगी पानी भरेगा ?
बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
बदायूं का राजनेतिक वातावरण कितना प्रदूषित हो गया है उसका अनुमान लगाना पूरी तरह मुश्किल हो गया था एक समय था जब राजनीति को समाजसेवा को समर्पित लोग सामने आया करते थे लेकिन अब तो ऐसा लग रहा है कि राजनीति पूरी तरह व्यवसायिक हो गई ह ैना कोई राह और ना कोई सिंद्धांत बस तिजोरी को भरना और सदा सुखी रहना एक मात्र उददेश्य बन गया है और हालात यह है कि किसी को अपने से बडा इमानदार, समर्पित और निष्ठावान कोई नहीं दिख रहा जबकि वास्तविकता में हालात पूरी तरह विपरीत हैं जो किसी को नहीं दिख रहे हैं। हां एक बात जरूर है कि राजनीति के बदलते परिवेश में आम आदमी के सुख और दुख में सहभागिता करने की वालों की संख्या अधिक हो गई है लेकिन राजनीति पूरी तरह व्यवसायिक स्पर्धा का ऐसा मैदान बन गई है जहां सेवाभाव से काम करने और कराने वालों को पूरी तरह दूर करके रख दिया है और मजे वह मार रहे हैं जनता की जेब और सरकार की योजनाओं के धन दोनों को दोनों हाथों से लूट रहे हैं।
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